Bhopal: मूंग खरीदी नीति के खिलाफ डटे किसान, सरकार से बातचीत बेनतीजा, मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

Bhopal News: मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी, खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी जारी रहा. संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.

आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री निवास और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. मंगलवार देर रात किसानों ने आंदोलन स्थल पर ही भोजन बनाया और वहीं डेरा डाल दिया.

भोपाल पहुंचने से पहले कई जगह रोका गया मार्च
मंगलवार को नर्मदापुरम से भोपाल तक किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने करीब 15 स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. इसके बावजूद हजारों किसान एक-एक कर सभी बैरिकेड पार करते हुए राजधानी की ओर बढ़ते रहे. कई जगह पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की, खींचतान और तीखी नोकझोंक भी हुई. करीब 15 किसान संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान क्रांति रैली निकाल रहे थे.

सरकार से बातचीत नहीं बनी
11वें मील पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में बैठक की. मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा, लेकिन बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि वे बिना समाधान के वापस नहीं लौटेंगे. उनका कहना है कि बुधवार को राजगढ़, शाजापुर, गुना, आगर मालवा और अशोकनगर समेत करीब 10 जिलों से भी किसान आंदोलन में शामिल होंगे.

लंबे आंदोलन की तैयारी, शहर में ट्रैफिक प्रभावित
किसानों का दावा है कि नर्मदापुरम से करीब 3 हजार किसान भोपाल पहुंचे हैं और वे अपने साथ सात दिन का राशन लेकर आए हैं. प्रदर्शन के कारण वीर सावरकर सेतु और नर्मदापुरम रोड पर करीब पांच घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही. रानी कमलापति स्टेशन से एम्स रोड तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं. ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए पुलिस ने कई मार्गों पर डायवर्जन भी लागू किया.

चार मांगों पर अड़े किसान
किसान चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इनमें मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी, खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करना, कम बारिश वाले क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना और भावांतर योजना को खत्म करना शामिल है. इस बीच ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों को कानूनी मोर्चे पर झटका भी लगा है, क्योंकि अदालत ने इस व्यवस्था को सही माना है. इसके बावजूद किसान अपने आंदोलन को जारी रखने पर अड़े हुए हैं.

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