75 साल और 15 उप राष्ट्रपति

भारतीय जनता पार्टी समर्थित चौथे उपराष्ट्रपति के रूप में महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल तमिलनाडु के सी पी राधाकृष्णन निर्वाचित हो गए। तमिलनाडु से राधाकृष्णन तीसरे व्यक्ति गई जो उप राष्ट्रपति बने है।उन्होंने इंडी गठबंधन के प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से पराजित किया। भारत के संविधान निर्माण से लेकर बीते 75 साल में देश में 15 उपराष्ट्रपति ने कार्य किया। उपराष्ट्रपतियो की सूची को देखे तो पचास फीसदी उपराष्ट्रपति किसी न किसी राज्य के राज्यपाल रहे है। माना जा सकता है कि उप राज्यपाल का संवैधानिक अनुभव कारगर होता है। चार केंद्रीय मंत्री,एक सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित दो मुख्य मंत्री भी देश के उप राष्ट्रपति निर्वाचित हुए है। केवल डा सर्व पल्ली राधा कृष्णन और मो हामिद अंसारी दो ऐसे राष्ट्रपति रहे जिनका अतीत राजनैतिक नहीं था।।

उप राष्ट्रपति पद के 6 व्यक्ति अपने उप राष्ट्रपति कार्यकाल के रहते देश के राष्ट्रपति भी बने। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मो हामिद अंसारी के हिस्से में आई। वे तीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल, प्रणव मुखर्जी और रामनाथ कोविंद के कार्यकाल में उप राष्ट्रपति रहे। आमतौर पर उपराष्ट्रपति रहते हुए या निवृत होने के बाद गैर राजनैतिक जीवन जीते है लेकिन मो हामिद अंसारी अछूते रहे और विवादास्पद टिप्पणी उनके हिस्से में आई।जबकि विद्वता के मामले में वे विदेश मामले में विलक्षण थे। विभिन्न देशों के राजनयिक के रूप में उनके पास दीर्घ अनुभव था। संयोग ये भी रहा कि दोनों राष्ट्रपति निर्विरोध निर्वाचित हुए। इन दोनों के अलावा डा शंकर दयाल शर्मा भी निर्विरोध निर्वाचित हुए है।

संविधान निर्माण के बाद उप राष्ट्रपतियो के ही राष्ट्रपति बनने की परंपरा सर्वपल्ली राधा कृष्णन से लेकर के आर नारायण तक लगभग जारी रही। शुरुवात के नौ उप राष्ट्रपति में से ,6 राष्ट्रपति बने। सर्वपल्ली डा राधाकृष्णन, जाकिर हुसैन, फिर आर वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा और के आर नारायण लगातार राष्ट्रपति बने। बीच में गोपाल कृष्ण पाठक, बी डी जत्ती, और मो हिदायतुल्लाह, की किस्मत इस मामले में अच्छी नही, वे उप राष्ट्रपति पद से ऊपर नहीं जा सके। राज्यपाल से उप राष्ट्रपति बनने वालों में जाकिर हुसैन, वी वी गिरी, गोपाल कृष्ण पाठक, बी डी जत्ती, कृष्णकांत, और जयदीप धनगड़ है। गोपाल कृष्ण पाठक केंद्रीय मंत्री भी रहे। केंद्रीय मंत्री से उप राष्ट्रपति बनने वालों में आर वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा, के आर नारायण सहित एम वैंकयानायडू रहे। दो मुख्यमंत्री बी डी जत्ती और भैरोसिंह शेखावत , मैसूर और राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे।

मो हिदायतुल्लाह, सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायधीश रहे है। नये उपराष्ट्रपति महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे।इस प्रकार 15उप राष्ट्रपति में सातवें व्यक्ति है जो राज्यपाल से उप राष्ट्रपति परंपरा के वाहक है। भाषाई आधार पर हिन्दी भाषी क्षेत्र के प्रधानमंत्री होने के कारण गैर हिंदी भाषी राज्यों के निवासियों को उप राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुखता दी गई। 15उप राष्ट्रपति में से 10 उप राष्ट्रपति गैर हिंदी भाषी राज्यों से है। सर्वपल्ली डा राधाकृष्णन, आर वेंकट रमन(तमिलनाडु) जाकिर हुसैन और एम वैकयानायडू (आंध्र प्रदेश) के आर नारायण (केरल) बी डी जत्ती (कर्नाटक), मो हामिद अंसारी (प बंगाल), कृष्णकांत(पंजाब), वी वी गिरी (उड़ीसा )से उप राष्ट्रपति बने है। हिंदीभाषी राज्यों राजस्थान से भैरो सिंह शेखावत और जयदीप धनगड़ मध्य प्रदेश से मो हिदायतुल्लाह और शंकर दयाल शर्मा और उत्तर प्रदेश से गोपाल स्वरूप पाठक उप राष्ट्रपति बने है।

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