नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार हो रही हिंसा और अशांति से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को निर्देश दिया है कि वह आतंकी गतिविधियों से जुड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के प्रावधान लागू करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करे।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की अपील का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी आपत्तियों के साथ कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट केंद्र सरकार के NIA जांच के आदेश को राज्य सरकार द्वारा दी गई चुनौती की जांच कर सकता है।
हाई कोर्ट पहले ही जता चुका है चिंता
20 जनवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार भड़क रही हिंसा पर गंभीर चिंता जताई थी। चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने राज्य पुलिस और प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी बुला सकती है।
दो जनहित याचिकाएं दायर
कलकत्ता हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की गई है। याचिकाओं में कहा गया कि पड़ोसी राज्यों में प्रवासी मजदूरों पर कथित हमलों के बाद इलाके में हिंसा भड़की।
16 जनवरी को झारखंड में बेलडांगा निवासी एक प्रवासी मजदूर की कथित मौत के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को करीब छह घंटे तक जाम कर दिया था। इसके अगले दिन 17 जनवरी की सुबह बिहार में मुर्शिदाबाद के एक प्रवासी मजदूर के साथ कथित बदसलूकी को लेकर सड़क और रेल मार्ग जाम किया गया था।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले में NIA जांच के आदेश जारी किए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में आगे की सुनवाई के लिए जाएगा।
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