Eid 2026: देश में शनिवार, 21 मार्च को ईद-उल-फितर का जश्न मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन अजमेर से महज 7 किलोमीटर दूर स्थित दौराई गांव की तस्वीर इस बार बिल्कुल जुदा है। जहां हर साल सवैयां की खुशबू और बच्चों की किलकारी गूंजती थी, वहां इस बार गलियां सूनी हैं और घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन से गमगीन है समाज
बता दें कि दौराई गांव में बड़ी आबादी में रहने वाले शिया समाज ने इस बार ईद न मनाने का सामूहिक फैसला लिया है। दरअसल, ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। समाज के लोगों का कहना है कि उनके रहनुमा के चले जाने के बाद जश्न मनाना मुमकिन नहीं है।
न नए कपड़े, न मिठाइयां
गौरतलब है कि हर साल इस मौके पर दौराई के बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन इस बार हालात इसके उलट हैं। घरों में न तो मिठाइयां बन रही हैं और न ही बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदे गए हैं। गांव की सड़कों पर होने वाली वो सालाना रंगाई-पुताई और रोशनी भी नदारद है। समाज के लोग काली पट्टी बांधकर अपना विरोध और शोक जाहिर कर रहे हैं।
मस्जिद में जुटेगा समाज, होगी शोक सभा
मिली जानकारी के अनुसार, कल रोजा मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर के नेतृत्व में एक विशाल शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। मौलाना ने साफ लफ्जों में कहा है कि यह समय उत्सव का नहीं बल्कि आत्ममंथन और दुख का है। सूत्रों के मुताबिक, पूरे इलाके में मातम जैसा माहौल है और शिया समुदाय ने एकजुट होकर सादगी के साथ इस वक्त को गुजारने का संकल्प लिया है।
दौराई गांव के इस फैसले का असर आसपास के व्यापार और सामाजिक तालमेल पर भी दिख रहा है। ईद के मौके पर होने वाला लाखों का कारोबार ठप पड़ गया है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि शोक सभा के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे। यह पहली बार है जब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का इतना गहरा असर अजमेर के किसी छोटे से गांव की ईद पर पड़ा है।
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