मुगलसराय. जनपद चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) क्षेत्र में गंगा को निर्मल बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण पिछले करीब 6 वर्षों से अधर में लटका हुआ है. इस देरी का खामियाजा सीधे तौर पर गंगा नदी और आसपास के पर्यावरण को भुगतना पड़ रहा है. शहर और फैक्ट्रियों से निकलने वाला लाखों लीटर गंदा और केमिकल युक्त पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के प्रतिदिन सीधे गंगा में गिराया जा रहा है.
बता दें कि रौना गांव स्थित गंगा किनारे करीब 126 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एसटीपी का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है. जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं, जबकि हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं. गंदे पानी का असर इतना खतरनाक है कि आसपास की जमीन बंजर होती जा रही है और जल में ऑक्सीजन स्तर घटने से जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है. धार्मिक दृष्टिकोण से भी स्थिति चिंताजनक है. पतित पावनी गंगा का जल अब न तो पीने योग्य रह गया है और न ही आचमन के योग्य. यह स्थिति स्थानीय लोगों की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंचा रही है.
परियोजना में देरी का एक बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण को बताया जा रहा है. रौना गांव के भूस्वामी अमित तिवारी ने बताया कि उनकी 18 बिस्वा जमीन में से 8 बिस्वा का अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि शेष जमीन प्लांट के बीच में फंसकर बेकार हो जाएगी. उन्होंने मांग की है कि या तो पूरी जमीन का मुआवजा दिया जाए या बची जमीन के बदले अन्यत्र जमीन उपलब्ध कराई जाए.
इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजीव मोहन सक्सेना ने बताया कि 126 करोड़ की इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के कारण देरी हुई है, लेकिन जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि नगर के साथ-साथ अन्य नालों को भी इस एसटीपी से जोड़ा जाएगा, जिससे दूषित पानी को गंगा में जाने से रोका जा सके. फिलहाल, सवाल यह है कि आखिर कब तक गंगा यूं ही प्रदूषण का बोझ ढोती रहेगी और कब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारा जाएगा.
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