शक्कर चोर, विभाग छोड़

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को कांग्रेस शासनकाल में हुए चांवल शक्कर घोटाले की बड़ी जांच के लिए दस्तावेज सौंप दिए जाने की खबर है। प्रधान मंत्री, केंद्रीय खाद्य मंत्री सहित प्रदेश के राज्यपाल, मुख्य मंत्री सहित प्रमुख सचिव को हस्तक्षेप करने के लिए ज्ञापन प्रेषित कर दिया गया है। हमर संगवारी सामाजिक संस्था के अध्यक्ष राकेश चौबे ने जानकारी दिया है कि खाद्य संचालनालय के अधिकारियों ने विधान सभा में धर्म लाल कौशिक द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्न क्रमांक 58 में गलत जानकारी दिया है।

खाद्य विभाग के डायरेक्टर द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के खंडन की प्रेस विज्ञप्ति भेजी थी।इसमें बताया गया है 2021 से 2023के दौरान 42110 क्विंटल शक्कर गायब होने संबंधी कोई प्रकरण या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। गजब का विभाग है जिसे ये भी पता नहीं है कि जिलों में पीडीएस के कांग्रेस शासनकाल में बदतर स्थिति थी। जिसकी जांच विधान सभा समिति कर रही है।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सितम्बर 2022 में सत्यापन कराने पर 15280 क्विंटल शक्कर गायब होना पाया गया था। विधान सभा में 24 मार्च 2023 की स्थिति में दी गई जानकारी से प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी का कोई मेल नहीं है।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि दुकान वालो से 15280 क्विंटल शक्कर में से 87 प्रतिशत याने 13740 क्विंटल शक्कर की वसूली कर ली गई है। खाद्य डायरेक्टर ने ये भी बताया है कि 22 दुकानों के खिलाफ एफआईआर, 166 दुकान निलंबित और 153 दुकान बर्खास्त कर दिया गया है। उपरोक्त जानकारी, खाद्य संचालनालय के घोटाले करने वाले अधिकारियों को बचाने के प्रयास के लिए झूठी जानकारी दी गई है। विधान सभा 2024 के बजट सत्र में पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माननीय धरम लाल कौशिक ने तारांकित प्रश्न क्रमांक 58 अंतर्गत खाद्य विभाग द्वारा परिशिष्ट अ और ब में जानकारी दी गई है।

प्रपत्र अ में 24.03.2023 की स्थिति में खाद्यान्न सामग्री के जिलेवार उचित मूल्य दुकान संख्या,राशन सामग्री मात्रा (टन में) और राशि( करोड़ रू) में दी गई है। इसमें भी वास्तविक मात्रा की जानकारी न देकर तकनीकी कारणों में शामिल मात्रा को घटा कर दिया गया है। खाद्य विभाग के एनआईसी में पद प्रभाव का उपयोग कर अरबों रुपए के घोटाले में लीपा पोती की गई है।

प्रदेश के 33 जिलों में बस्तर के 344, कांकेर के 275, कोंडागांव के 233, कोरबा के 307, सक्ती के 276, बेमेतरा के 167, कवर्धा के 351, खैरागढ़ के 205, बलौदा बाजार के 227 और गरियाबंद के 188 राशन दुकानों में शक्कर गायब मिली है। खाद्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी में 2808.04 टन शक्कर की कमी पाई गई है। शक्कर का बाजार मूल्य 4000 रूपये क्विंटल है। इस हिसाब से 114.60 करोड़ रुपए होता है।
विधान सभा के प्रश्न क्रमांक 58 में परिशिष्ट ब में 24.03.2023 की स्थिति में केवल शक्कर की अनियमितता के लिए 2847 राशन दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 231 राशन दुकान निलंबित हुई है और 160 राशन दुकान बर्खास्त किया गया है।

1167 राशन दुकानों को राजस्व वसूली की नोटिस तहसीलदारों से जारी किया गया है।केवल 10 राशन दुकान के विरुद्ध शक्कर की गड़बड़ी के लिए एफआईआर दर्ज कराने की लिखित जानकारी विधान सभा में दी गई है। राकेश चौबे ने आरोप लगाया है कि अनेक जिलों से संपर्क किए जाने पर कारण बताओ नोटिस की संख्या में भी अंतर है। खाद्य संचालनालय के एक अधिकारी ने जिसके द्वारा तेरह हजार राशन दुकानों का घोषणा पत्र जन भागेदारी पोर्टल से गायब करवाया गया है उसके द्वारा जिन राशन दुकानों में कमी पाई गई थी उनकी संख्या की कारण बताओ नोटिस देने की गलत जानकारी भेजी है। इससे साफ है कि विभाग द्वारा या तो विधान सभा में गलत जानकारी दी गई है या अभी गलत जानकारी दी जा रही है।

खाद्य डायरेक्टर का ये कहना भी हास्यास्पद है कि 2021से 2023के दौरान शक्कर गायब होने का कोई प्रकरण या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अगर गड़बड़ी नहीं थी तो 2847 राशन दुकानों को कारण बताओ नोटिस क्यों जारी की गई।1167 राशन दुकानों को राजस्व वसूली की नोटिस क्यों दी गई? हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने विधान सभा प्रश्न 58 के साथ संलग्न परिशिष्ट अ और ब भी भेजा है। राकेश चौबे ने कहा है कि फूड संचालनालय के डायरेक्टर स्पष्ट करे कि कौन सी जानकारी सही है और कौन सी गलत। उन्होंने विधान सभा के अध्यक्ष डा रमन सिंह, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक और खाद्य मंत्री सहित खाद्य सचिव को दस्तावेज भेज कर डायरेक्टर फूड के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है। राकेश चौबे ने कहा है कि इस मामले की जानकारी विधान सभा जांच समिति के सभापति से व्यक्तिगत मुलाकात कर जानकारी देंगे।

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