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बिना मांगे 23 लाख का लोन! शिक्षिका के नाम पर कैसे हुआ खेल? OTP से फ्रॉड के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त

बिलासपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच ने एक शिक्षिका के बगैर आवेदन के 23.07 लाख रुपए के पर्सनल लोन स्वीकृत और विरित किए जाने के मामले में बैंकिंग लोकपाल को 30 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बैंकिंग लोकपाल के निर्णय तक संबंधित बैंकों को शिक्षिका के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता सुधा कौशल पति यशवंत सिंह लात्रे, आयु 36 वर्ष निवासी नरहरपुर, कांकर ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि यस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक ने उनकी ओर से कोई ऋण आवेदन दिए बिना उनके नाम पर कुल 23 लाख 7 हजार रुपए के कई पर्सनल लोन स्वीकृत कर दिया है।

बैंकिंग लोकपाल के समक्ष भी शिकायते
याचिका में कहा गया कि आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल ओटीपी के आधार पर ऋण स्वीकृत और वितरित किए गए। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि धोखाधड़ी का पता चलने के बाद पुलिस में शिकायत की गई। मामले में थाना कोतवाली रायपुर और थाना कांकेर में 8 अप्रैल 2025 को अपराध दर्ज हुआ।

बैंक कार्रवाई के कारण आर्थिक परेशानी हो रही
याचिकाकर्ता ने खुद को कम वेतन पाने वाली कर्मचारी बताते हुए कथित ऋण और बैंक कार्रवाई के कारण आर्थिक परेशानी होने की बात कही। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षिका सुधा कौशल को 15 दिन के भीतर बैंकिंग लोकपाल, आरबीआई क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

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