रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले बड़ा फैसला लेते हुए 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति के नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। इस वजह से 1400 से अधिक छात्र इस साल 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे।
मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने बताया कि जिन छात्रों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम रही, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई है। कुल 1413 विद्यार्थियों का ईयर बैक हुआ है। इनमें 10वीं के 1063 और 12वीं के 350 छात्र शामिल हैं। अब ये छात्र अगले सत्र में उपस्थिति पूरी करने के बाद परीक्षा दे सकेंगे।
बोर्ड परीक्षा का शेड्यूल
हाईस्कूल (10वीं) की परीक्षा 21 फरवरी से 13 मार्च तक आयोजित होगी। इस कक्षा में 3,20,535 छात्र पंजीकृत हैं और उनके लिए 2510 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। वहीं हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षा 20 फरवरी से 18 मार्च तक चलेगी। इसमें 2,45,785 छात्र पंजीकृत हैं और 2395 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
मंडल ने दिव्यांग और दुर्घटनाग्रस्त छात्रों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। जिन विद्यार्थियों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर या अन्य चोट के कारण लिखने में परेशानी है, उनके लिए लेखक (राइटर) की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए अलग परीक्षा केंद्र भी बनाए गए हैं।
सत्र की शुरुआत में तय किए गए नियम
- 10वीं और 12वीं के नियमित छात्रों के लिए पूरे सत्र में 75% उपस्थिति अनिवार्य है।
- कम उपस्थिति की स्थिति में केवल मेडिकल सर्टिफिकेट जैसे वैध दस्तावेज देने पर ही छूट मिल सकती है।
- जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में नियमित उपस्थिति की समीक्षा करने के निर्देश हैं।
- कम उपस्थिति वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं और परामर्श की व्यवस्था की जा सकती है।
- 75% से कम उपस्थिति होने पर छात्र को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती।
इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। कई अभिभावक जहां नियम को अनुशासन के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं प्रभावित छात्र इसे कड़ा कदम मान रहे हैं।
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