राजिम। मिट्टी को आकार देकर भगवान श्रीगणेश का विराट और आकर्षक स्वरूप गढ़ना आसान नहीं, लेकिन जब कला में आस्था और साधना का मेल हो तो मिट्टी भी जीवंत नजर आने लगती है। राजिम के युवा मूर्तिकार रमन चक्रधारी इन दिनों अपनी इसी कला से पूरे छत्तीसगढ़ में पहचान बना रहे हैं। गणेशोत्सव के करीब आते ही उनके हाथों से तैयार गणेश प्रतिमाओं की मांग रायपुर, बिलासपुर और धमतरी से लेकर कांकेर, जगदलपुर और सरगुजा तक पहुंच गई है।
14 फीट के गणेशजी बिलासपुर रवाना
राजिम के मेला मैदान के समीप रमन चक्रधारी और उनकी टीम दिन-रात गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है। इस बार खास तौर पर विराट स्वरूप वाली प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। रमन ने बताया कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की अवधारणा पर श्रीगणेश की प्रतिमा तैयार की है, जिसे देखने के लिए राजिम के मेला मैदान में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं बिलासपुर के लिए तैयार की गई 14 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा चार दिन पहले ही राजिम से रवाना हो चुकी है।
जगदलपुर के लिए तैयार हो रही 11 फीट की प्रतिमा
बस्तर संभाग के जगदलपुर के लिए 11 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा तैयार की जा रही है। मूर्तिकार के मुताबिक प्रतिमा का काम अंतिम चरण में है और इसे दो दिन बाद जगदलपुर के लिए रवाना किया जाएगा।
मूर्तिकला को सेवा और साधना मानते हैं रमन
रमन चक्रधारी की खासियत सिर्फ उनकी मूर्तिकला नहीं, बल्कि भगवान गणेश की प्रतिमा निर्माण के प्रति उनकी आस्था और समर्पण भी है। वे मूर्ति बनाने को केवल काम नहीं, बल्कि भगवान गणेश की सेवा और साधना मानते हैं। प्रतिमा के निर्माण में मिट्टी के चयन से लेकर स्वरूप, भाव-भंगिमा और बारीकियों तक वे खुद विशेष ध्यान देते हैं। यही वजह है कि उनकी बनाई प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
16 से 18 घंटे तक कर रहे मेहनत
गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ रमन और उनकी टीम की मेहनत भी चरम पर पहुंच गई है। टीम के सदस्य रोजाना करीब 16 से 18 घंटे तक लगातार काम कर रहे हैं। विशाल प्रतिमाओं को आकार देने के बाद अब उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही टचिंग और सजावट का काम शुरू होगा। महीनों की मेहनत और साधना अब इन विराट प्रतिमाओं के भव्य स्वरूप में साफ नजर आने लगी है।
रायपुर से सरगुजा और बस्तर तक पहुंची कला
रमन चक्रधारी के हाथों से तैयार गणेश प्रतिमाएं अब राजिम तक सीमित नहीं हैं। रायपुर, धमतरी और कांकेर जैसे शहरों के साथ न्यायधानी बिलासपुर और बस्तर के जगदलपुर तक उनकी प्रतिमाओं की मांग पहुंच चुकी है। सरगुजा क्षेत्र में भी यहां तैयार प्रतिमाएं पहुंच रही हैं। इससे राजिम की पारंपरिक मूर्तिकला और स्थानीय कलाकारों को प्रदेश स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
आस्था और कला का अनोखा संगम
रमन चक्रधारी आज राजिम में मूर्तिकला के क्षेत्र में एक पहचान बना चुके हैं। उनकी कला में मेहनत के साथ भगवान गणेश और माता सरस्वती के प्रति गहरी आस्था भी दिखाई देती है। मिट्टी से विराट स्वरूप गढ़ने वाले रमन की कला अब राजिम की सीमाओं से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी छाप छोड़ रही है। इस गणेशोत्सव में उनके हाथों से तैयार 14 फीट के गणेशजी बिलासपुर और 11 फीट के गणेशजी जगदलपुर में विराजेंगे।
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