आज दिल्ली की राम लीला मैदान में कांग्रेस तथाकथित 13 करोड़ वोटर्स के वोट काटे जाने के विरोध में लीला कर रही है। लीला में प्रमुख मांग है मुख्य निर्वाचन अधिकारी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे। कांग्रेस की लीला में बहुत से विरोधी दल पात्र के रूप में सामने से पीछे से शामिल है। छत्तीसगढ़ के हर जिले से एक एक बस में लीला दिखाने कार्यकर्ता गए है।अच्छी बात है विरोधी पार्टी विरोध नहीं करेगी तो कौन करेगा।
काकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में इस्तीफा धरना, इस्तीफा प्रदर्शन, इस्तीफा रैली, किसी न किसी विरोधी दल के द्वारा किया जा रहा है। अब इस्तीफा अनशन और इस्तीफा आमरण अनशन शेष बचा है।आने वाले समय में इसके प्रकार की लीला देखने को मिलेगी। धर्म ग्रन्थों के अनुसार इस प्रकार की लीला,.नित्य लीलाकहलाती है जो समय, काल और युग के बंधनों से परे निरंतर चलती रहती है।
इसे आप प्रबुद्ध लीला भी मान सकते है जिसमें पार्टी भक्तों को ज्ञान मिलता है। कांग्रेस सहित विरोधी दल देश के 99 करोड़ वोटर्स को बताना चाह रहे है कि निर्वाचन आयोग ने 13 करोड़ वोटर्स के नाम काट दिए है,इन्हीं के चलते कांग्रेस सहित दीगर विरोधी दल लोकसभा के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव हार गए। तमिलनाडु में डीएमके और भाजपा समर्थित एआईएडीएमके दोनों पार्टियों को थलपति विजय ने हरा दिया। विजय को डीएमके के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने वाली कांग्रेस ही समर्थन दे रही है।

कांग्रेस की मांग है कि देश और राज्यो में फिर से चुनाव होना चाहिए। आज की कांग्रेस लीला में दो माँगो के बीच आम आदमीपार्टी ने पंजाब में चार माह बाद होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए 40 प्रत्याशियों की सूची जारी कर ये संकेत दिया है कि लीला चलती रहे लेकिन पंजाब में आप की लीला में व्यवधान नहीं होगा। उधर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी विधान सभा चुनाव के लिए कमर कस रही है, वे लीला में दूर के दर्शक है।
इधर भाजपा ने कमर कस लिया है कि कितनी भी लीला हो जाए ज्ञानेश कुमार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहेंगे ही। लीला करने वालो को वे चुनौती दे रहे है कि जितनी मेहनत इस्तीफा लीला के लिए कर रहे है उतनी मेहनत 13 करोड़ पीड़ित वोटर्स के लिए अपनी अपने पार्टी कार्यालय में कैंप लगाकर दस्तावेज इकट्ठा कर निर्वाचन आयोग के मुंह पर मारने के लिए करते तो सार्थकता बनती। ज्यादा राज्यों में नहीं तो कम से कम उत्तर प्रदेश और पंजाब में एक महीने का कैंप लगाकर पीड़ित वोटर्स के हित में काम कर लेते तो वोटर्स का भला होता। कागजी मेहनत करने के बजाय हल्ला गुल्ला करने से 99 करोड़ वोटर्स को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
जिन 13 करोड़ वोटर्स के नाम कटे है वे इन 99 करोड़ के रिश्तेदार तो नहीं ये तय है अन्यथा इस देश का आम नागरिक स्वयंस्फूर्त आंदोलनरत हो जाता क्योंकि वोटर आईडी एक महत्वपूर्ण परिचय पत्र है। हर वयस्क व्यक्ति जानता है कि वोट तो पांच साल में एक बार डालना है लेकिन परिचय तो हर दिन कही न कही देना होता है।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter