Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा के खिलाफ रिट याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. अब ये सुनवाई 11 अगस्त को SC में होगी. भूपेश बघेल ने शराब घोटाले में ED की जांच प्रक्रिया और मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम(PMLA) की कई धाराओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
‘ED ने कोर्ट से परमिशन नहीं ली’
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने ED की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. भूपेश बघेल ने PMLA की धारा 44, 50, 63 को चुनौती दी है. भूपेश बघेल का आरोप है कि एक बार चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट की परमिशन के बिना दोबारा चार्जशीट दाखिल नहीं होती है. लेकिन ED ने ऐसा नहीं किया है. ED ने बिना परमिशन के ही दोबारा चार्जशीट दाखिल कर दी है. धारा 50 के तहत आरोपी से ही अपने खिलाफ गवाही लेना न्याय की मूल भावना के खिलाफ है.
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए चैतन्य बघेल
3200 करोड़ के शराब घोटाला मामले में ED की टीम ने पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे को 18 जुलाई गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद चैतन्य को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिनों की रिमांड पर भेज दिया गया था. इसके बाद 22 जुलाई को भी कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की रिमांड पर भेज दिया था. 4 अगस्त को जब चैतन्य की रिमांड खत्म होने वाली थी, उससे पहले कोर्ट ने सुनवाई करते हुए फिर से चैतन्य को 14 दिन की रिमांड पर भेज दिया है.
क्या है 3200 करोड़ का शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सरकार थी यानी साल 2018 से 2023 के बीच प्रदेश में करीब 3200 करोड़ से अधिक का शराब घोटाला हुआ. इसे लेकर EOW ने चार्जशीट में जानकारी देते हुए बताया कि इस घोटाले के पैसे से 11 आरोपी अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम करोड़ों रुपए की जमीन और दौलत खरीदी है. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि अभी तक EOW के मुताबिक पूरे शराब घोटाले में करीब 61 लाख अवैध पेटी शराब बिकवाकर 2174 करोड़ रुपए की चपत लगाई गई थी, लेकिन जब इन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई तो पता चला कि यह घोटाला 2174 नहीं बल्कि 3200 करोड़ रुपए से अधिक का है.
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter