UP News: पश्चिम बंगाल के कोलाकाता से भागकर आया एक शख्स उत्तर प्रदेश के नोएडा में धोखे और ठगी का ऐसा जाल बिछाकर रखा था कि उसने फर्जी इंटरनेशनल पुलिस स्टेशन और IB ऑफिस ही खोल दिया. उसका कनेक्शन तृणमूल पार्टी पार्टी (TMC) से भी निकला है. जानें क्या है पूरा मामला-
कोलकाता से भागकर आया नोएडा
पश्चिम बंगाल के बीरभूम से ताल्लुक रखने वाले विभाष चंद के खिलाफ पश्चिम बंगाल में कुछ घोटालों की जांच चल रही है. इस बीच वह कोलकाता से भागकर उत्तर प्रदेश के नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) आ गया. यहां अपने साथियों के साथ मिलकर उसने नोएडा के सेक्टर 70 में एक फर्जी इंटरनेशनल पुलिस स्टेशन (इंटरपोल) और अपराध जांच ब्यूरो (IB) का ऑफिस खोल लिया.
बंगाल से नोएडा तक ठगी, नोटिस के जरिए वसूली
UP पुलिस ने विभाष चंद, उसके बेटे और अन्य आरोपियों को कथित तौर पर फर्जी इंटरपोल और IB ऑफिस चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि वह सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से पैसे वसूलता था. उसका बेटा और अन्य साथी पश्चिम बंगाल में लोगों को फर्जी नोटिस भेजते थे और पैसे वसूलते थे.
जमीन विवाद सुलझाने का वादा
जांच में सामने आया कि यह गिरोह लोगों के जमीन विवाद सुलझाने और उनके काम करवाने का वादा करते था. पूरे गिरोहा का मास्टरमाइंड विभाष ही था. उसका बेटा अपनी गाड़ियों पर इंटरपोल का स्टीकर लगाकर लोगों को डराता था. पश्चिम बंगाल के साथ-साथ वह नोएडा में भी लोगों से झूठा वादा करते थे.
TMC कनेक्शन आया सामने
इस गिरोह के मास्टरमाइंड विभाष चंद का TMC कनेक्शन भी सामने आया है. वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पूर्व ब्लॉक प्रमुख है. नोएडा से पहले वह कोलकाता में भी ऐसे कई अपराधों में लिप्त रहा है. जानकारी के मुताबिक उसने उत्तरी कोलकाता के बेलियाघाटा इलाके में सीआईटी रोड पर 2 फ्लैट किराए पर लिए थे. इन फ्लैटों से ही वह फर्जी दफ्तर संचालित करता था, जिस पर ‘इंटरपोल’, ‘सामाजिक न्याय की जांच’ और ‘पुलिस’ जैसे बोर्ड लगे थे.
दिल्ली-कोलकाता में खूब संपत्ति, नीली बत्ती वाली गाड़ी से आते थे
जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी आने-जाने के लिए नीली बत्ती वाली एक गाड़ी का उपयोग करती था. इसके अलावा उसके पास नई दिल्ली और कोलकाता में कई घर और अलग-अलग जगहों पर कॉलेज होने का भी खुलासा हुआ है.
शिक्षक भर्ती घोटाला में भी आरोपी
विभाष चंद के बारे में जांच में सामने आया कि वह शिक्षक भर्ती घोटाले में भी आरोपी था. वहीं, CBI ने पश्चिम बंगाल की जेल में बंद पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी माने जाने वाले अधिकारी से भर्ती मामले में 2023 में कई बार पूछताछ की थी.
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