हारे को हरिनाम जीते को हरिद्वार

रायपुर पश्चिम विधानसभा चुनाव में विकास उपाध्याय राजेश मूणत से दो बार विधान सभा चुनाव हारने वाले कांग्रेस के प्रत्याशी है। विकास उपाध्याय कह सकते है कि एक बार उन्होंने राजेश मूणत को हराया भी है।सही बात है। विकास उपाध्याय सहित कांग्रेस को आश्चर्य हुआ होगा कि जितने वोट से जीत मिली थी उससे ढाई गुना वोट से हार गए। एक भी पोलिंग बूथ ऐसा नहीं था जहां से विकास उपाध्याय का बढ़त अध्याय खुला हो।

डेढ़ साल तक मौन धारण करने के बाद अचानक ही राहुल गांधी के वोट चोरी का छत्तीसगढी संस्करण निकल गया कि राजेश मूणत का नाम दो मतदाता सूची में है। इस कारण राजेश मूणत की जीत व्यर्थ है। कांग्रेस का काम विपक्ष में रह कर ऐसे नरेटिव सेट करना है जिससे लोगों को लगे कि सत्ता में आने के लिए कांग्रेस सड़क की लड़ाई लड़ रही है, सही लड़ाई लड़ रही है। चुनाव आयोग की माने तो हर चुनाव के पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य संपादित होता है। वयस्क मतदाता का नाम जुड़ता है लेकिन नाम उन्हीं मतदाता का कटता है जो बाकायदा आवेदन करते है अन्यथा नाम जुड़ा ही रहता है।

अब मुद्दे की बात हो जाए। एक मतदाता का नाम वार्ड परिवर्तन होने पर पुराने वार्ड में रहता ही है, नए वार्ड में भी जुड़ जाता है। अब हारे हुए को कैसे समझाया जाए कि एक उंगली में अमिट स्याही लगने के बाद वहीं व्यक्ति उसी दिन दूसरे पोलिंग बूथ पर जाकर मतदान कर दे वह भी प्रत्याशी! एक से अधिक मतदाता सूची में नाम होने पर भी एक डेढ़ महीने तक अमिट स्याही के चलते कोई भी मतदाता दूसरा वोट नहीं डाल सकता। कोई पकड़े या ना पकड़े पीठासीन अधिकारी पकड़ ही लेगा। ये बात न राहुल गांधी समझ रहे है न विकास उपाध्याय और न ही कांग्रेस।

बस, हार का ठीकरा फोड़ने का मुद्दा चाहिए। बिहार में 65लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अगर किसी का नाम कट गया है तो लिखित दावा कर सकता है।अगर किसी का गलत तरीके से नाम जुड़ गया है और पता है तो लिखित आपत्ति भी किया जा सकता है। राजनीति में गाल बजाने से हल्ला मच सकता है, सुर्खियां बटोरी जा सकती है लेकिन ऐसे मतदाता जिनका दो या दो से अधिक मतदाता सूची में नाम है वे वोट भी डाले और भाजपा को ही दे, संभव नहीं है। बिहार ही नहीं हर राज्य में बाहरी मतदाता है जो देश भर में फैले है वे जरूर दो बार मतदान कर सकते है। बिहार तो ऐसे कार्य के लिए स्वर्ग है।

बिहार से पलायन किए अधिकांश लोग दीगर राज्य में रहते है और बिहार में भी मतदाता है। इस बार वे लोग नहीं दिखेंगे। वे दावा भी नहीं कर सकते क्योंकि इस बार जो लोग दावा करेंगे उन पर चुनाव आयोग की नजर रहेगी। विकास उपाध्याय जी लगे हाथ बिहार और महाराष्ट्र के मतदाताओं की सूची फिल्टर करा ही लीजिए। ये लोग महाराष्ट्र में भाजपा को जीता कर बिहार में भी भाजपा को जिताने आने वाले थे लेकिन चुनाव आयोग ने उनको काट दिया है.

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