कहने से ज्यादा करने में यकीन रखने वाले मुख्यमंत्री

दो दिनों तक चले कलेक्टर कांफ्रेंस से जो उभर कर सामने आया, उस पर पब्लिक डोमेन में चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से अपने संदेश में कहा कि काम स्वयं बोलता है। आप कहें कम, जमीनी स्तर पर इसे बेहतर तरीके से क्रियान्वित करें। मुख्यमंत्री का साफ मतलब यह था कि अच्छा काम करोगे तो काम स्वयं आपका पीआर करेगा, आपको बोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यही बात नये सीएस ने अलग ढंग से कही, उन्होंने बायोमीट्रिक अटेंडेंस को अपनाने की जरूरत के संबंध में बड़े मौके की बात कही। उन्होंने कहा कि कलेक्टर यदि 10 बजे आफिस में बैठ जाएं तो सारे अधिकारी-कर्मचारी समय पर आयेंगे, सिस्टम के पिरामिड के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति जैसा व्यवहार करता है निचले अधिकारी कर्मचारी भी इसे फालो करते हैं।

हिमाचल प्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री रहे शांता कुमार की प्रसिद्धि ही इसलिए हुई थी कि उन्होंने आफिस का टाइमटेबल परफेक्ट कर दिया था लेकिन यह काम उन्होंने सख्ती से किया था। साय सरकार इसे बुद्धिमतापूर्वक कर रही है। काम वही, सोच नई।

नवाचारों पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी बड़ी रोचक थी। उन्होंने नौकरशाही की नब्ज को पकड़ लिया। प्रायः देखा गया है कि कलेक्टर अपनी छाप छोड़ने कुछ ऐसे नवाचार कर देते हैं जिसमें काफी खर्चा आता है उनका पीआर तो हो जाता है लेकिन बजट की तुलना में यह नवाचार प्रभावी नहीं होता और अगला कलेक्टर अमूमन इसे बदल भी देता है। इस पर मुख्यमंत्री ने सही ही कहा कि नवाचार तो हो पर यह तुगलकी प्रयोग न हो, सब से मिलजुलकर पूछकर इसे करें ताकि जनहित में इसका लाभ हो।

कोर एजेंडा नहीं छोड़ा- पुलिस की बैठक में उन्होंने मतांतरण, गौतस्करी, घुसपैठ जैसे बीजेपी के कोर इशू को सबसे ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से पुलिस को कहा कि प्रलोभन द्वारा अथवा प्रताड़ित कर मतांतरण होता है तो कठोर कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने उदाहरणों के साथ अपनी बात रखी। कलेक्टर कांफ्रेंस में होता यह है कि मुख्यमंत्री केवल एजेंडे के अनुसार काम करने के निर्देश दे देते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अपराध इसलिए हुआ क्योंकि नशाखोरी हुई, नशाखोरी इसलिए हुई क्योंकि ड्रैग ट्रैफिकिंग पर कहीं ढिलाई भी बरती गई। यद्यपि उन्होंने ड्रग ट्रैफिकिंग पर व्यापक तौर पर किये गये कार्य की प्रशंसा की।

इस राज्य में 44 प्रतिशत जंगल हैं लेकिन पहली बार साय सरकार ने ही डीएफओ लोगों को कलेक्टर कांफ्रेंस में बुलाया। केवल बुलाया नहीं, अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन दिया। मैसेज साफ था कि जंगल में मंगल नहीं चलेगा। परफार्मेंस दिखाना होगा। एक अधिकारी को वन विभाग में वापस भी भेजा गया। साफ है कि सरकार फारेस्ट में बढ़िया परफार्मेंस दिखाना चाहती है।

जिन विभागों में काम कमजोर हुआ है वहां मुख्यमंत्री ने नाराजगी भी दिखाई है। खनन ऐसा ही मामला है जिससे सरकार की किरकिरी होती है। साफ है कि अब कलेक्टर-एसपी ज्यादा सचेत होंगे। ला एंड आर्डर के मामले में तो सरकार बेहद सख्त दिखी। महासमुंद में महिला अपराधों के मामले में, राजनांदगांव में हत्या वाले मामले में तथा धमतरी में ढाबा वाली घटना का जिस तरह संज्ञान लिया गया, उससे स्पष्ट है कि सरकार बेहद बारीकी से एक एक इशू उठा रही है।

मुख्य सचिव विकास शील, प्रमुख सचिव( मुख्यमंत्री) सुबोध सिंह ने भी अधिकारियों को आगाह कर दिया कि हर कलेक्टर सरकार की राडार में है और काम करो था मत चूको चौहान जैसा मामला अपनाने में ही भला है।

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