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जगदलपुर में अमित शाह का नक्सलवाद पर कड़ा संदेश, विकास और शांति का भरोसा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर पंडुम के समापन समारोह में शामिल होने जगदलपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मंच से नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अब बस्तर में मुट्ठीभर ही नक्सली बचे हैं। उन्होंने नक्सलियों से सरकार की पुनर्वास योजना के तहत आत्मसमर्पण करने की अपील की और चेतावनी दी कि हथियार नहीं छोड़ने पर सुरक्षा बलों द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि पहले बस्तर का बड़ा हिस्सा नक्सल हिंसा की चपेट में था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलवाद कमजोर पड़ा है। उन्होंने जवानों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि हथियार का जवाब हथियार से ही दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर ने करीब 45 वर्षों तक नक्सलवाद का दंश झेला है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के चलते अब क्षेत्र शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नक्सलवाद अंतिम सांसें ले रहा है।

अमित शाह ने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले कलाकारों की प्रशंसा की और घोषणा की कि संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और राष्ट्रपति के साथ रात्रिभोज करेंगे।

उन्होंने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों के खेतों की सिंचाई के लिए 3600 करोड़ रुपए की लागत से परियोजना शुरू की जाएगी, जिससे बिजली उत्पादन भी होगा। इसके अलावा रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना और नदी जोड़ो परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर के युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। आने वाले पांच वर्षों में बस्तर को देश का सबसे विकसित और समृद्ध संभाग बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अब नक्सली गतिविधियां सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर की सीमाओं तक सीमित रह गई हैं। केवल कुछ इलाकों में ही नक्सली सक्रिय हैं और उनकी संख्या लगभग 150 के आसपास बताई जा रही है। लगातार चल रहे संयुक्त अभियानों से नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है, जिससे कई ने आत्मसमर्पण किया है और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं।

प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ-साथ विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बस्तर के लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें और क्षेत्र स्थायी शांति की ओर आगे बढ़ सके।

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