अवैध सट्टेबाजी से कमाया पैसा ‘अपराध की आय’ मानी जाएगी, दिल्ली हाईकोर्ट से ED को मिला लाइसेंस

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अवैध सट्टेबाज़ी से होने वाली कमाई को भी अपराध की आमदनी माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ऐसे पैसे को “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” माना जा सकता है, क्योंकि जब कमाई का स्रोत ही गैरकानूनी हो, तब उससे प्राप्त हर लाभ उसी अपराध से जुड़ा माना जाता है।

अदालत ने उदाहरण देकर समझाया कि जैसे “जहरीले पेड़ का फल भी जहरीला” होता है, ठीक वैसे ही अपराध से कमाया गया धन भी आपराधिक ही माना जाएगा। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अपराध से जुड़ी आय की “बदनामी आगे तक जाती है”, चाहे बाद में होने वाली लेन-देन की गतिविधियां PMLA की अनुसूची में शामिल हों या नहीं।

2015 के सट्टेबाज़ी नेटवर्क केस में आया फैसला
यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है, जिनका संबंध 2015 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई एक बड़े क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट की जांच से था। ED के मुताबिक, यह नेटवर्क ऑफशोर प्लेटफॉर्म, हवाला ऑपरेटरों और घरेलू एजेंटों के जरिए धन का प्रवाह नियंत्रित करता था। जांच में एक वर्ष के भीतर करीब 2,400 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला था।

छापेमारी में नकदी, दस्तावेज और विभिन्न डिजिटल सबूत मिले, जिनसे यह सामने आया कि मुख्य आरोपी विदेशी सट्टेबाजी वेबसाइटों पर विशेष लॉगिन आईडी के माध्यम से एक्सेस कंट्रोल संचालित करते थे। ED का कहना था कि भले ही सट्टेबाजी स्वयं PMLA की अनुसूची में शामिल अपराध नहीं है, लेकिन उससे हासिल लाभ अवैध पैसों पर आधारित है, इसलिए उसे अपराध की आय माना जाना चाहिए।

अदालत ने आरोपियों की दलील की खारिज
आरोपियों का तर्क था कि सट्टेबाजी PMLA के तहत अनुसूचित अपराध नहीं है, इसलिए इससे हुई कमाई को जब्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि PMLA में प्रोसीड्स ऑफ क्राइम की परिभाषा जानबूझकर व्यापक रखी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि असल महत्व इस बात का है कि पैसे का स्रोत क्या है यदि कमाई की जड़ गैरकानूनी है, तो बाद की गतिविधियों की प्रकृति मायने नहीं रखती।

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