दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court)ने एक महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न (sexually harassing)और पीछा करने के आरोपी मालिक के खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है. इसके बदले कोर्ट ने आरोपी को 6 महीने तक सरकारी अस्पताल में सामुदायिक सेवा (community service) करने का आदेश दिया है. जस्टिस रविन्द्र डुडेजा की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता को बुलाकर उसकी इच्छा जानने की कोशिश की. पीड़िता ने बताया कि उसके और आरोपी के बीच समझौता हो चुका है, और अब उसे इस मुकदमे की सुनवाई को जारी रखने में कोई आपत्ति नहीं है.
इसके बाद, बेंच ने आरोपी की मामले को बंद करने की याचिका को स्वीकार कर लिया. हालांकि, बेंच ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि यह एक आपराधिक मामला है, आरोपी को बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता. इसलिए, आरोपी को दिल्ली के सरकारी अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया गया.
बेंच ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि अदालतों में कई मुकदमे लंबित हैं. ऐसे में यदि कोई शिकायतकर्ता अपने मामले को समाप्त करने की इच्छा व्यक्त करता है, तो उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. बेंच ने यह भी कहा कि भले ही आरोपी को मुकदमे से राहत दी जा रही है, लेकिन उसे एक ऐसी सजा दी जा रही है जो उसके और समाज के लिए लाभकारी है.
बेंच ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह अगले छह महीनों तक हर रविवार को एलएनजेपी अस्पताल में सामुदायिक सेवा करेगा. आदेश के अनुसार, आरोपी को एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के समक्ष उपस्थित होना होगा, जो उसे सेवा का कार्य सौंपेंगे. यह चिकित्सा अधीक्षक की जिम्मेदारी होगी कि वह आरोपी से किस प्रकार की सेवा कराना चाहते हैं.
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके नियोक्ता ने नौकरी के दौरान उसे अश्लील टिप्पणियों, अवांछित शारीरिक संपर्क और सोशल मीडिया पर पीछा करके लगातार यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया. इसके अलावा, उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया गया.वर्ष 2022 में पीड़िता ने यौन उत्पीड़न, पीछा करने और महिला की गरिमा का अपमान करने के तहत FIR दर्ज कराई थी.
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