अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ की वो महान हस्तियां बन गई है जिसका राज्य के कस्टम मिलिंग चांवल घोटाले में भी जुड़ गया है । पिछले कितने घोटाले में नाम है ये विषय नहीं रह गया है।कितने और घोटाले में शामिल है ये देखने की बात है।
अनिल टुटेजा तो भाजपा शासनकाल में भी आलोक शुक्ला के साथ मिलकर नान में घोटाला कर चुके थे। पैसे के बल पर न्यायधीश खरीदने का भी जुर्म इनके नाम है। अरबों का घोटाला अनिल टुटेजा करने के बाद कांग्रेस शासनकाल में बड़े दल्ला बनकर उभरे। घोटाले का पुराना अनुभव था ही। सारे घोटाले के सरताज बन गए। भूपेश बघेल के कार्यकाल में हर विभाग में लूट खसोट के लिए अधिकारी नियुक्त किए गए थे।
कोयला घोटाले के मास्टर माइंड समीर विश्नोई को धान के कस्टम मिलिंग विभाग मार्कफेड का जिम्मा इसी कारण दिया गया था लेकिन बदकिस्मत रहे। मनोज सोनी, जिन पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति खत्म होने की तलवार लटक रही थी, उन्होंने वसूली सेठ बनने का जिम्मा लिया। अनिल टुटेजा के खास रोशन चंद्राकर सह वसूली सेठ बने। मार्कफेड में कोयला घोटाले के समान ही 20रुपए क्विंटल का खेल चला। 15 फीसदी राशि मनोज सोनी को मिलता था शेष राशि रोशन चंद्राकर, अनिल टुटेजा को पहुंचाते थे।मार्फत अनवर ढेबर था, इसका खुलासा जांच एजेंसी ने कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। अनिल टुटेजा बता रहे हैं कि वे खाद्य विभाग में नहीं रहे है, अनिल टुटेजा तो आबकारी में भी नहीं थे, खनिज में भी नहीं थे,लोक सेवा आयोग में भी नहीं थे,लेकिन कमीशन तो बटोर रहे थे। आपके खिलाफ पर्याप्त सबूत है इस कारण गिरफ्तार किए गए है।
जांच एजेंसी के रडार में खाद्य विभाग का एक बड़ा अधिकारी भी है जिसके चलते राशन दुकानों का चांवल का 600 करोड़ का घोटाला हुआ है। भाजपा ने ही कांग्रेस शासनकाल में इस घोटाले को उठाया था। बताया जाता है कि राशन दुकानों के चांवल को राइस मिलो को देने के लिए सिंडिकेट बना हुआ था। राशन के बचत चांवल की पूर्ति कस्टम मिलिंग के लिए किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा में खाद्य विभाग के अधिकारी की लिखित शिकायत के बाद ही अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की गिरफ्तारी हुई है। माना जा रहा है कि जल्दी ही खाद्य विभाग के अधिकारी की गिरफ्तारी हो सकती है।
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