CG News: दिव्यांगों के नाम पर बनाया फर्जी NGO, फिर अरबों का घोटाला, अब 6 IAS समेत 15 अधिकारियों के खिलाफ होगी CBI जांच

CG News: छत्तीसगढ़ में राज्य स्त्रोत निःशक्त जन संस्थान अस्पताल के नाम पर हुए एक हजार करोड़ के घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए हैं. इसमें 6 IAS समेत 15 अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं.

6 IAS समेत 15 अधिकारियों के खिलाफ होगी CBI जांच
इस मामले में जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डीबी ने अपने आदेश में कहा है कि एक हजार करोड़ का एनजीओ घोटाला इस मामले में पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह, राज्य के 6 IAS अधिकारी आलोक शुक्ला, विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल और पीपी सोती समेत सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा पर लगाए गए आरोप प्रारंभिक तौर पर सही पाए गए. इस गंभीर मामले की स्थानीय एजेंसियों और पुलिस से जांच कराना सही नहीं होगा. हाईकोर्ट ने CBI को 15 दिनों में सभी दस्तावेज जब्त करते हुए जांच के आदेश दिए हैं.

दिव्यांगों के नाम पर अरबों का घोटाला
साल 2004 में छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए स्टेट रिसोर्स सेंटर (ARC) नाम से स्वशासी संस्था की स्थापना की. इसका उद्देश्य तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता के माध्यम से दिव्यांगों का पुनर्वास करना था. 2012 में इसी के अंतर्गत फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीआरआरसी) की स्थापना की गई, जिसका मुख्य कार्य दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना था.

जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह बात सामने आई कि ये संस्थाएं केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके माध्यम से सरकार से करोड़ों रुपए का अनुदान लेकर कथित गड़बड़ी की जा रही थी. शिकायतों के अनुसार, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इन संस्थाओं में पदाधिकारी के रूप में शामिल थे.

जांच में ये गड़बड़ियां उजागर

  • वित्त विभाग के ऑडिट में 31 अनियमितताएं,
  • SRC का 14 साल तक ऑडिट नहीं हुआ,
  • फर्जी नामों से वेतन उठाए गए,
  • नगद भुगतान के सबूत मिले,
  • कृत्रिम अंग-मशीनें कभी नहीं खरीदी गईं,
  • 2019 में SRC को भंग कर खाते बंद हुए.

वहीं इस मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता और उच्चाधिकारियों की कथित संलिप्तता को देखते हुए CBI को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जारी रखनी होगी. कोर्ट ने CBI को 15 दिन में जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं.

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