अचानकमार टाइगर रिजर्व में हुई फायरिंग की सनसनीखेज घटना (Firing Incident In ATR) ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर और खतरनाक सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला दिसंबर के अंतिम सप्ताह का है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना का वीडियो सामने आने के बावजूद एटीआर प्रबंधन लंबे समय तक आंख मूंदे बैठा रहा। जब वन मुख्यालय से दबाव बढ़ा, तब जाकर प्रबंधन हरकत में आया और आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की गई।
सर्च वारंट के बाद भी फरार आरोपी आज़ाद,वन विभाग पर सवाल….
तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि चौथा आरोपी अब भी फरार है। सूत्रों के मुताबिक फरार आरोपी एक भाजपा नेता का बेटा बताया जा रहा है, जिसके चलते राजनीतिक दबाव में कार्रवाई कमजोर होने के आरोप लग रहे हैं। स्थिति यह है कि सर्च वारंट जारी होने के बावजूद एटीआर प्रबंधन फरार आरोपी को पकड़ने में अब तक नाकाम रहा है।
जांच के घेरे में अफसर, जवाब के इंतजार में जनता….
इससे वन विभाग की निष्पक्षता और गंभीरता पर सवाल और गहरे हो गए हैं। इस मामले पर जब हमारी टीम ने बिलासपुर सांसद तोखन साहू और मुख्य वन संरक्षक अधिकारी मनोज कुमार पांडेय से बात की, तो उन्होंने दावा किया कि सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपी के खिलाफ भी चालान पेश कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि लापरवाही बरतने वाले गेट मैन को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि दो डिप्टी रेंजर और एक रेंजर को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
फरार आरोपी पर सवाल, क्या रसूख के आगे झुका सिस्टम? (Firing Incident In ATR)
अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह कार्रवाई सच में निष्पक्ष और सख्त होगी? या फिर दबंगों और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश एक बार फिर सिस्टम पर भारी पड़ेगी? अब नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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