कांग्रेस के भीतर जो भीतरघात का खेल चल रहा है उसको थामने के लिए सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ लैंड करना पड़ गया। भले ही राज्य में कांग्रेस के वोट चोरी अभियान को गति देने का बहाना था लेकिन असली मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन से उठा विवाद था। लाख प्रयास के बाद भी चम्मचों और कार्यकर्ता के बीच कांग्रेस फंसी हुई है। इससे बड़ी बात ये हो गई कि ईडी बस्तर में घोटाले के पैसे से बनी कांग्रेस भवन को अटैच करने पहुंच गई ।सब तरफ से हैलो माय टेस्टिंग चल रही है।एक और मुद्दा जुड़ गया।
पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, जिनके कार्यकाल में 600 करोड़ का राशन घोटाला हुआ है, उनको चांवल चोरी, माफ करे वोट चोरी अभियान पर बोलने के लिए मंच में मौका दिया। सालों बाद मौका मिला था सो भूल गए। माइक छीन लिया गया। प्रदेश में आदिवासी नेता का माइक छिनना मतलब संविधान में प्राप्त मूल अधिकार अंतर्गत अभिव्यक्ति के हनन का मुद्दा बन गया।
राजनीति में अगर आपके बेट से बाल लगी तो कैच तो होगा ही खिलाड़ी शोर मचाने लगते है। वोट चोरी एक तरफ आदिवासी नेता से माइक चोरी मुद्दा बन गया। सब कुछ कैमरे के सामने हुआ तो ट्रोल हो गया। भाजपा कह रही है कांग्रेस में आदिवासियों का सार्वजनिक अपमान हो रहा है। मुद्दा आग की तरह फैलने लगा तो जिस अमरजीत भगत से माइक छीना गया था उन्हें ही माइक के सामने आना पड़ गया।
अमरजीत भगत होशियार राजनीतिज्ञ है। एक तरफ उनसे जिस तरह माइक छीना गया, उसको उन्होंने सामने वाले को संस्कृति की नासमझी बता दिया। जब गुबार निकल गया तो आगे बोल गए कि अगर भाजपा को अपमान लग रहा है तो सम्मान समारोह करवा कर बड़े बड़े माला पहना दे। भाजपा ये अवसर नहीं खोएगी ।आयोजन करेगी लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधान सभा चुनाव के हारने पर मूंछ दांव पर लगाने वाले अमरजीत भगत पलटीमार निकले।
भाजपा सम्मान समारोह आयोजित करेगी तो जायेंगे नहीं क्योंकि ऐसा होने से सही में हैलो माय टेस्टिंग वन, टू, थ्री हो जाएगा। अमरजीत भगत को कांग्रेस के शासन काल में टी एस बाबा के सरगुजा में प्रभाव कम करने का ठेका मिला था लेकिन खुद का ही तंबू उखड़ गया। बाबा भी निपट गए। अब अमरजीत भगत को वोट चोरी अभियान में जुट जाना चाहिए।
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