भूपेश बघेल के पिता सनातन धर्म के विरोधी थे।इसी चक्कर में दो दो राज्यों की पुलिस उनके पीछे लगी रहती थी। भूपेश बघेल के पिता जाति विरोधी भी थे।ब्राह्मण विरोध जग जाहिर था। जींस का पीढी दर पीढ़ी ट्रांसफर होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। भूपेश बघेल भी इसी काम में लग गए। उनके कार्यकाल में रायपुर में धर्म संसद का आयोजन हुआ था। आयोजनकर्ता अनेक थे। उनमें एक प्रमोद दुबे भी थे। धर्म संसद में वैचारिक बवाल हुआ और ऊपर से आदेश जारी हो गया।प्रमोद दुबे एफ आई आर कराओ।
कांग्रेस के समर्पित सिपाही थे प्रमोद दुबे, स्वार्थवश आगे आ गए। एफ आई आर भी हो गई। छत्तीसगढ़ राज्य के कुछ बिके हुए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी संत कालीचरण को गिरफ्तार करने में भिड़ गए। संत कालीचरण ने कोई नई बात नहीं कही थी।देश की सैकड़ों पत्र पत्रिकाओं में लिखे बातों का अपने ढंग से उल्लेख किया था। एक परिवार विशेष को खुश करने के लिए धर्म संसद के सदस्य नत मस्तक हो गए। संत कालीचरण गिरफ्तार हो गए। उन्होंने तब श्राप दिया था कि जितने लोग उनके लिए साजिश किए है उनके ऊपर आपदा आएगी और नुकसान होगा।
राम सुंदर दास, रायपुर दक्षिण और विकास उपाध्याय रायपुर पश्चिम से चुनाव लड़े।इतने अधिक मतों से हारे कि राम सुंदर दास ने राजनीति को छोड़ दिया। विकास उपाध्याय, फिर से सड़क की राजनीति में उतर गए है। अगले बार टिकट मिलने में सुबोध हरितवाल आड़े आयेंगे।टिकट नहीं मिली तो संत कालीचरण का श्राप का असर माना जाएगा। एफआईआर लिखाने वाले प्रमोद दुबे के दुर्दिन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दक्षिण से टिकट नहीं मिली। पत्नी महापौर चुनाव में लाखों वोट से हार गई।
संत कालीचरण को नुकसान पहुंचाने वालों में अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अनवर ढेबर, जैसे लोग शामिल थे।सभी के सभी जेल पहुंच गए। अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर तो ज्यादा ही श्रापित लगते है। जमानत के लिए दौड़ रहे है पर मिल नहीं रही है।
अंत में आते है भूपेश बघेल, संत कालीचरण के बारे में बहुत कुछ सार्वजनिक रूप से कहा था। श्राप का असर ये हुआ कि आसपास के सारे चहेते अधिकारी और प्राइवेट सिंडिकेट की टीम अन्दर हो गई।
भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल बिट्टू जेल पहुंच गए। अब बारी भूपेश बघेल की है। डरे हुए भूपेश बघेल (ऐसा समाचार पत्रों में छपा था) जांच एजेंसी को सहयोग करने की बात बोल रहे है। एजेंसी को केंद्र सरकार का तोता मैना, पिट्ठू बोलने वाले भूपेश बघेल को इस देश के संविधान, न्यायालय, कानून पर भरोसा करना पड़ेगा। बाहर रहो, या बाहर रहने के लिए अग्रिम जमानत याचिका लगाओ या अंदर हो जाओ। सारे रस्ते खुलते और बंद न्यायालय से होते है।
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