मलकानगिरी मे रहेंगे कवासी लखमा

378 दिन रात गुजरने के बाद कांग्रेस के पूर्व शराब मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दिया है। सशर्त जमानत है जिसमें से सबसे महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है कि छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रहेंगे। ऐसे ही शर्तों के साथ, आईएसएस रानू साहू, समीर विश्नोई और सौम्या चौरसिया भी जमानत पाए है। सौम्या चौरसिया तो सभी जांच एजेंसियों के जद में है तो उनको फिलहाल एक अन्य मामले में सेंट्रल जेल रायपुर में बसंत ऋतु को काटना पड़ रहा है।

देश में न्यायालयों पर मामलों की इतनी भरमार है कि कोई भी मामला में निर्णय होने में पांच साल का सबसे कम समय तय है।इसके बाद के समय की सीमा नहीं है। इसी कारण जमानत देर सबेर मिलना तय ही है। सौम्या चौरसिया को भी ऐसी सुविधा मिल जाने की उम्मीद है। मामला छत्तीसगढ़ राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे या फंसाए गए कवासी लखमा का है।साल भर से सेंट्रल जेल में सुविधाओं से मुक्त जीवन जी रहे थे।अब सारी सुविधा मिलेगी लेकिन अपने राज्य छत्तीसगढ़ को छोड़ कर,क्योंकि आदेश सुप्रीम कोर्ट का है।

शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बाहर होने के लिए कहा है। अगर घर से 300 किलोमीटर की दूरी तय कर दी होती तो लखमा को लेने के देने पड़ गए होते। पड़ोस में उड़ीसा राज्य है।घर से तीन किलोमीटर दूर है मलकानगिरी,छींकेंगे तो भी पता चल जाएगा। यही रहने की तैयारी है। लखमा जैसे रानू साहू,समीर विश्नोई ,सौम्या चौरसिया के पास बुद्धि नहीं है अन्यथा वे लोग भी महाराष्ट्र के गोंदिया में एकात किराए का घर ले लेते।

खैर, अरूणपति त्रिपाठी पर झांसा देकर दस्तखत करवाने का आरोप लगाने वाले लखमा के जेल से निकलने पर वही आरोप लगे है जो चैतन्य बघेल के निकलने पर लगा था। जेल के ताले टूट गए लखमा जेल से छूट गए। नारा लगाने वाले को ये समझ नहीं है कि जेल के ताले टूटते नहीं है जमानत मिलने पर खोले जाते है अन्यथा अनिल टुटेजा ही जान रहे होंगे कि जमानत न मिलने पर ताले खुल नहीं रहे है।

Check Also

CG High Court: नक्सल इलाके में तैनात जवानों के ‘आउट ऑफ़ टर्न’ प्रमोशन का मामला, हाई कोर्ट ने DGP को दिया दो महीने का समय

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *