छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है, कोई मुंबई, दिल्ली, कोलकाता ,चेन्नई जैसे महानगरों की राजधानी से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ की व्यवसायिक राजधानी है। राज्य बनने के बाद यहां कारोबार फल फूल रहा है। जाहिर है यहां के लोग भी अपने तौर तरीके महानगरों जैसा ही रखेंगे। हर महानगर में हर अच्छी बातों के साथ बुरी बातों का भी चलन बढ़ता है।रायपुर में भी बढ़ रहा है या यूं कहिए द्रुत गति से पसर रहा है।संगठित अपराध का गढ़ बन गई है राजधानी। कौन से प्रकार का अपराध यहां नहीं होता? हत्या बिना नागे के हो रहे है। लूटपाट खुले आम हो रहा है।
बलात्कार स्वाभाविक घटना है।अपहरण नई बात नहीं है। रंगदारी जारी है। ब्याज का धंधा सुरक्षित रूप से चल रहे है। बचा क्या? हां ड्रग्स का धंधा भी है, शानदार मुनाफे का धंधा, पांच हजार रुपए ग्राम, आधा किलो भी बिक गया तो लखपति। ऐसे धंधे वालो को प्रोटेक्शन मनी देने में कोई गुरेज नहीं है।पुलिस विभाग के अनेक अधिकारी इनके क्लाइंट है। इनके परिवार के लोग ही नशे के आदी हो चुके है। इससे बढ़कर राजनीतिज्ञों का भी संरक्षण है, ये बात बाजार में है।जब सैया ही कोतवाल बन गए है तो डर काहे का।
एक नया कांड हुआ है स्ट्रेंजर पार्टी का। अलग अलग आओ,अनजान से रिश्ता बनाओ रूहानी या जिस्मानी ,सब चलेगा। फीस भर दे दो। रायपुर में एक विशेष प्रकार का रईस वर्ग है। अकूत संपत्ति है, शौक निराले है। दिक्कत ये है कि रायपुर से बाहर भाग नहीं सकते। परिवार संदेह करता है। ऐसे में घर में लिजिए सुविधा बाहर की। एक बढ़िया काम है – इवेंट,।इसके आड में सब हो रहा है। फैशन शो, होते ही रहते है, जाहिर है ऐसे शो में पुरुषों को कौन देखेगा।महिलाएं है, मॉडल है। शाम को रैंप पर और रात को जहां बोलेंगे वहां चलेंगी।
आदमी पहले फार्म हाउस सुकून के लिए बनाया करता था, आज भी सुकून पा रहा है बस तरीका बदल गया है। ये प्राइवेट पार्टी केवल शराब और शबाब के लिए होती है।पुलिस को नेताओं के रोड क्लियरेंस से फुर्सत नहीं है ऊपर से ऊपर का दबाव है।जब तक अति न हो तब तक चलने दो।इसके बाद एकात कौआ टांग देना। हो गई कार्यवाही। ये सब छत्तीसगढ़ की राजधानी में चल रहा है। सायं सांय, विकास हो रहा है, महतारी वंदन चल रहा है। राजधानी अपराध का गढ़ बन चुका है।
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