महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक को विधानसभा में पेश किया है. आज इस विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई. इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधेयक के उद्देश्य और इसकी विभिन्न धाराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी. सोमवार को इस बिल को पेश करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है, और इसका मकसद सिर्फ जबरदस्ती, धोखे या लालच से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है.
महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने गैर-कानूनी तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के मकसद से विधानसभा में बिल पेश किया है. इस बिल का शिवसेना (यूबीटी) ने समर्थन किया है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है. खास बात यह है कि इस विधेयक को शिवसेना उद्धव ठाकरे ने भी समर्थन दिया है. विधेयक की प्रस्तावित धाराओं के अनुसार, यदि जबरन या किसी की इच्छा के विरुद्ध धर्मांतरण किया जाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे मामलों में अधिकतम 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, यदि कानून का उल्लंघन कर धर्मांतरण किया जाता है तो इसमें शामिल व्यक्ति या संस्था दंड के पात्र होंगे. ऐसे धर्मांतरण को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जाएगा. कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध धर्मांतरण के आधार पर हुए विवाह को निरस्त माना जाएगा. ऐसे विवाह से जन्म लेने वाले बच्चे का धर्म वही माना जाएगा, जो उसकी मां का मूल (पूर्व) धर्म था. हालांकि, बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा. इसके अलावा संबंधित महिला भरण-पोषण (पोटगी) की मांग भी कर सकती है और ऐसे मामलों में बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी.
राजनीति में ऐसे मौके बहुत ही कम होते हैं, जब पक्ष और विपक्ष एक साथ आते हैं. महाराष्ट्र की सियासत में भी ऐसा ही मौका आया है, जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे महायुति सरकार के समर्थन में आए हैं. मौका है जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून का. महायुति सरकार के इस बिल का शिवसेना (यूबीटी) ने समर्थन किया है.
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