बासी सरकार यानी कांग्रेस की सरकार के मुखिया सर डॉन लिए एक अच्छी खबर के साथ साथ एक बुरी खबर भी आ ही जाती है। एक तरफ सौम्या चौरसिया,जेल से अंतरिम जमानत पाकर खुली हवा में दूसरे राज्य में सांस लेने के लिए बाहर आई। इधर छत्तीसगढ़ राज्य की जांच एजेंसी ने दिल्ली में विजय भाटिया को पकड़ लिया। भाटिया दो साल से मोस्ट वांटेड आदमी था। शराब घोटाले में पैसे इकट्ठे कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने का ठेका विजय भाटिया का ही था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने जब शराब घोटाले से पहला पर्दा उठाया था तब विजय भाटिया का नाम आ चुका था। बताया तो ये भी जाता है कि घोटाले के सौ रुपए में से केवल पंद्रह रुपए अनवर ढेबर तक आते थे बाकी पच्यासी रुपए दुर्ग जिले में सर डॉन के यहां भेज दिया जाता था।
राज्य की जांच एजेंसी को विजय भाटिया चार दिन के लिए रिमांड पर मिला है। इसी के साथ भाटिया के यहां छापेमारी भी की गई है।इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज मिलने की खबर है।वैसे बासी सरकार में कंप्यूटर, पीडीएफ, सहित मोबाइल डेटा उड़ाने में विजय भाटिया ने ज्यादा दिमाग नहीं लगाया होगा तो डेटा रिकवर हो जायेगा। बेइमानी में ईमानदारी का कच्चा चिट्ठा दो कारणों से सुरक्षित रखा जाता है। पहले बेइमानी में विघ्न संतोषी ये जरूर बताते है कि अपने लिए अलग हिस्सेदारी का खेल चल रहा है। दूसरे मिला कितना, दिया कितना ये जरूरी है।
अगर इन बातों का इलेक्ट्रॉनिक सोर्स से जानकारी मिलती है तो सर डॉन सहित सेठानी के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी क्योंकि बासी सरकार में घोटाले के हर सोते से पानी एक जगह होकर ही जाता था। आखिर भाई, अम्मा के नाम से जमीन जो खरीदना था। फिल्मों में “विजय” का चरित्र अमिताभ बच्चन ने बहुत जिया है।पुलिस के टेबल पर पैर रख कर विजय पूरा नाम बताते थे।यहां के विजय की कहानी दूसरी है।टेबल पर अधिकारी बैठे है और विजय, कहेंगे मै केवल फेंके हुए पैसे उठाता था मालिक,
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