रायपुर। राजधानी रायपुर के शहीद चुड़ामणी वार्ड क्रमांक-38 के अंतर्गत समता गूह निर्माण सोसायटी के बाहर चिरहुलडीह में शिकायत कर्ता की पुरखौती जमीन में प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर उस पर निर्माण कर लिया था। पूरा मामला ऑनलाइन नामांतरण से जुड़ा हुआ है। मामले में जोन क्रमांक-7 के जोन कमिश्नर ने तहसीलदार रायपुर को पत्र लिखकर चिरहुलडीह के पटवारी हल्िा नंबर 00052 के खसरा नंबर 905, 906 और 907 के संबंध में भू-स्वामित्व की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। पत्र की प्रतिलिपि नगर निवेशक नगर पालिक निगम रायपुर और आयुक्त नगर निगम रायपुर को भी दी गई है। मामले में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से लगाए जाने के बाद निगम प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच में आगे बढ़ी है।
ऐसे किया खेल
बताते चले कि समता सोसायटी के बाहर स्थित इस जमीन पर सोसायटी के सदस्य शांतिदेवी महोबिया पति भूपेंद्र महोबिया के नाम से रजिस्ट्री कराया। दर्ज जमीन का खसरा नंबर 905, 906 संभावित बताया गया है। उनके नाम से खसरा नंबर 908/2, 908/3 कर बी-1 बनाकर दिया गया। यहां बता दें कि रजिस्ट्री में खसरा नंबर और अन्य जानकारी सही होने के बाद रजिस्ट्री होती है। ऐसे में पटवारी रिकार्ड में उक्त जमीन का खसरा नंबर बदल कर दूसरे खसरे नंबर के नाम से बी-1 जारी कर दिया गया।

रजिस्ट्री किसी और खसरा का, बी-1 दूसरे की जमीन का जारी कर फर्जीवाड़ा किया गया। जमीन मालिक की जमीन का खसरा नंबर 905, 906, 907 है। पूरे मामले को देखा जाए तो स्पष्ट है कि 30 नवंबर 2023 को जब से इसका आदेश तहसीलदार ज्योति सिंह ने जारी किया है, तब से इस पर अवैध कब्जा करने की शिकायत लगातार की जा रही है। कलेक्टर जनदर्शन से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी शिकायत हुई, पर जिला प्रशासन ने कोई जांच नहीं की। विधानसभा में मामला लगने के बाद जुलाई में निगम के जोन 7 के कमिश्नर ने मामले की वस्तु स्थिति जानने रिपोर्ट तहसीलदार से मांगी है।

फर्जी वाड़ा और आईएएस अफसर की ससुराली जमीन
यहां यह बता दें कि मामले में एक आईएएस अफसर के ससुराली परिवार से जूड़े मामले में कमिश्नर से लेकर कलेक्टर की कलम से जांच के संबंध मं एक लाइन नहीं लिखी गई। जमीन पर अफसरों कह गिद्ध निगाह के चलते निगम प्रशासन ने भी नक्शा पास कर दिया। गलती महसूस होने पर जोन कमिश्नर ने नोटिस जारी किया, लेकिन जिला प्रशासन के अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। पूरा मामला फर्जी वाड़ा का है। वैसे यहां बातते चले कि राज्य प्रशासनिक सेवा की जिस बैच की अफसर अभी प्रमोट होकर आईएएस अवार्ड हुआ, वह पूरा बैच विवादों में रहा। ऐसे में उनकी ससुराली जमीन भी फर्जीवाड़ा किया गया। मामले में दोषी अफसरों ने आरआई, पटवारी से खेल करा लिया।
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