छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छ भारत अभियान के दावों की जमीनी हकीकत (Pond Stench) वार्ड क्रमांक 63, जोरापारा में आकर दम तोड़ती नजर आ रही है। एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन पूरे प्रदेश में स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर सहभागिता निभा रहा है, वहीं दूसरी ओर जोरापारा के निवासी पिछले कई वर्षों से तालाब और गंदी नालियों से उठने वाली असहनीय दुर्गंध के बीच रहने को विवश हैं।
स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाता वार्ड 63 , (Pond Stench)
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे गंदगी के इस आलम से त्रस्त हो चुके हैं और नगर निगम प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक बार-बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें आज तक कुछ हासिल नहीं हुआ है। वार्ड में नालियों की निकासी व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण सड़न और संक्रमण का खतरा बना रहता है, जिससे क्षेत्र में बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
इस गंभीर समस्या पर जब वार्ड पार्षद श्याम साहू से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने विकास कार्यों का हवाला देते हुए बताया कि उनके निरंतर प्रयासों से जोरापारा तालाब के सौंदर्यीकरण, नई नालियों के निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए सात करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है। पार्षद का दावा है कि इन कार्यों के शुरू होने के बाद वार्ड की तस्वीर बदल जाएगी, हालांकि वर्तमान में स्थिति जस की तस बनी हुई है और स्थानीय जनता अब भी प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रही है।
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