दुश्मन का दुश्मन बना भारत का सहारा, ईरान-इजराइल जंग में मोदी सरकार ने ऐसे किया इस्तेमाल

इजराइल और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच तेहरान में मौजूद भारतीय छात्रों को सुरक्षा कारणों से बाहर निकाल लिया गया है. रेसेक्यू किए गए छात्र आर्मेनिया में प्रवेश कर गए हैं. आर्मेनिया वो मुल्क है जिसके भारत के साथ बेहतर संबंध हैं. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का साथ देने वाले अजरबैजान का ये दुश्मन है. दोनों के बीच 2020 में ही जंग हुई थी. यानी इस मुश्किल वक्त में दुश्मन (अजरबैजान) का दुश्मन (आर्मेनिया) भारत का सहारा बना है.

बता दें कि ईरान में 4 हजार से ज्यादा भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें से ज्यादातक छात्र हैं. इनमें से कई छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं और मेडिकल और दूसरे पेशेवर कोर्स में पढ़ रहे हैं. जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के अध्यक्ष नासिर खुहामी फंसे हुए छात्रों के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा, कश्मीर घाटी के 90 छात्र, विभिन्न राज्यों के अन्य छात्रों के साथ सुरक्षित रूप से आर्मेनिया में प्रवेश कर गए हैं, जिससे यह संख्या 110 हो गई है. उनमें से ज़्यादातर उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं.

इससे पहले जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की थी और जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए पत्र लिखा था. कश्मीरी छात्र आमतौर पर ईरानी विश्वविद्यालयों को समान सांस्कृतिक परिवेश के कारण चुनते हैं.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय दूतावास सभी संभव सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से समुदाय के साथ संपर्क में है. बयान में कहा गया है, तेहरान में भारतीय छात्रों को सुरक्षा कारणों से बाहर निकाल लिया गया है. इसकी व्यवस्था दूतावास ने की. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा, कुछ भारतीयों को आर्मेनिया की सीमा के माध्यम से ईरान छोड़ने में मदद की गई है.

आर्मेनिया और अजरबैजान की दुश्मनी 40 साल पुरानी है. दोनों सोवियत संघ का हिस्सा रहे हैं. 80 के दशक के आखिर में दुश्मनी की शुरुआत हुई थी. अजरबैजानी क्षेच्र नागोर्नो-कराबाख आर्मेनिया के समर्थन से बाकू से अलग हो गया था. इस क्षेत्र में ज्यादातर जातीय आर्मेनियाई आबादी थी.

आर्मेनिया और भारत के रिश्ते
आर्मेनिया के संबंध जहां भारत से बेहतर हैं तो अजरबैजान का झुकाव पाकिस्तान की तरफ रहता है. आर्मेनिया भारत से रॉकेट लॉन्चर, तोपखाना बंदूकें और एंटी मिसाइल खरीदता है. आर्मेनिया ने भारत के साथ 2022 में एक डिफेंस डील साइन की थी. जिसके तहत भारत ने आर्मेनिया को एंटी-ड्रोन सिस्टम, एटीएजीएस टोड हॉवित्जर, टीसी-20 (एमएआरजी) व्हील्ड सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर, अश्विन बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर और आकाश वायु रक्षा मिसाइल निर्यात किया था

वहीं, अजरबैजान की बात करें तो पिछले महीने पाकिस्तान से हुए तनाव में वो उसके साथ खड़ा था. हालांकि ये कदम उसको भारी पड़ा और भारतीयों ने अच्छे से सबक सिखाया. दरअसल, भारतीय अच्छी खासी संख्या में अजरबैजान की राजधानी बाकू घूमने जाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीयों ने बॉयकॉट अजरबैजान कैंपेन चलाया. लोगों ने वहां की बुकिंग रद्द कर दी. इसका असर ये हुआ कि अजरबैजान को झटका लगा और उसको घाटा सहना पड़ा.

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