भोपाल: ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। भोपाल रेलवे डिविजन में रूटीन क्वालिटी चेक के दौरान IRCTC के रेल नीर पानी और खुले बेसन का सैंपल तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। जुलाई में हुई जांच के बाद लैब रिपोर्ट सामने आने से रेलवे के खान-पान की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है और उसी बैच की अन्य बोतलों के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
रोजाना 1.14 लाख यात्री करते हैं सफर
भोपाल रेलवे डिविजन में रोजाना औसतन करीब 1.14 लाख यात्री सफर करते हैं। अकेले भोपाल जंक्शन पर प्रतिदिन 150 से ज्यादा ट्रेनों का ठहराव होता है और करीब 70 हजार यात्रियों का फुटफॉल रहता है। ऐसे में पानी और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता का मामला सीधे बड़ी संख्या में यात्रियों से जुड़ा है।
जुलाई में रूटीन टेस्टिंग के दौरान रेल नीर के एक सैंपल की जांच की गई थी। रिपोर्ट में यह निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल होने वाले खुले बेसन का सैंपल भी फेल पाया गया।
रोज 5 हजार रेल नीर की बोतलों की सप्लाई
मंडीदीप प्लांट से भोपाल डिविजन के प्रमुख स्टेशनों पर हर दिन करीब 5 हजार रेल नीर की बोतलें सप्लाई की जाती हैं। इनमें रानी कमलापति, नर्मदापुरम, इटारसी, विदिशा और गंजबासौदा जैसे स्टेशन शामिल हैं।
14 रुपए प्रति लीटर की कीमत के हिसाब से रोजाना करीब 70 हजार रुपए की रेल नीर सप्लाई होती है। सालाना कारोबार करीब 2.55 करोड़ रुपए तक पहुंचता है। ऐसे में एक सैंपल के फेल होने के बाद रेलवे ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
रेलवे ने कहा- एक सैंपल के आधार पर निष्कर्ष नहीं
भोपाल डिविजन की माने तो रेल नीर की नियमित जांच की जाती है। एक सैंपल पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद उसी बैच की अन्य बोतलें भी जांच के लिए मंगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि IRCTC के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे और आगे की जांच के लिए करीब 10 बोतलें भेजी गई हैं। रेलवे का कहना है कि टेस्टिंग प्रक्रिया को पूरी तरह सही तरीके से सुनिश्चित किया गया है।
इटारसी में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
भोपाल डिविजन के इटारसी बेस किचन में इससे पहले भी जांच के दौरान एक्सपायरी और घटिया खाद्य सामग्री मिलने पर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसी स्थिति में रेल यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले खाने और पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी को लेकर रेलवे पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
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