एमपी में आदिवासियों के लिए योजनाओं पर रिसर्च शुरू:हॉस्टल, स्कॉलरशिप, रहन-सहन की तैयार होगी रिपोर्ट; 8 जिलों में टीम करेगी काम

मध्यप्रदेश के 8 जिलों में आदिवासी समाज के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं की हकीकत जानने और रिपोर्ट तैयार करने का काम अब एक टीम करेगी। इसके लिए जनजातीय कार्य विभाग ने टीआरआईएफ (ट्रांसफर रुलर इंडिया फाउंडेशन) के साथ समझौता (MoU) किया है।

इस समझौते के तहत धार, अलीराजपुर, मंडला, देवास, बड़वानी, राजगढ़, सीहोर और झाबुआ जिलों में टीआरआईएफ के चुने हुए युवा फेलो के रूप में काम करेंगे। ये फेलो छात्रावासों की स्थिति, वन अधिकार कानून के पट्टों का वितरण, छात्रवृत्ति और दूसरी योजनाओं पर रिसर्च कर सरकार को रिपोर्ट देंगे।

क्या काम करेंगे फेलो?

छात्रावासों की पढ़ाई और रहन-सहन की गुणवत्ता सुधारना।
छात्रवृत्ति योजनाओं का सही फायदा बच्चों तक पहुंचाना।
वन अधिकार कानून के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना।
योजनाओं की निगरानी और रिपोर्ट बनाना।

यह सुविधाएं मिलेगी

फेलो को जिलों में काम करने के लिए प्रशासन की तरफ से पूरा सहयोग मिलेगा। उन्हें इंटरनेट, ऑफिस स्पेस, यात्रा और फील्ड विजिट की सुविधा दी जाएगी। वे प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर योजनाओं की निगरानी करेंगे और जरूरी सुधार सुझाएंगे।

इस पहल से आदिवासी समाज की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति मजबूत होगी और सरकार की योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देगा।

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