रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवक अपना ई-केवाईसी करवाना शासन के निर्देश के अनुसार अनिवार्य किया गया है। यह प्रक्रिया मार्च से शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 18 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने ये काम नहीं करवाया। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग लगातार निर्देश दे रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ई-केवाईसी न कराने वाले शासकीय सेवकों को किस बात डर है कि वे यह आवश्यक काम नहीं करा रहे हैं?
प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत 18 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने अब तक ई-केवाईसी (नो योर कस्टमर) अपडेट नहीं कराया है। वित्त विभाग ने इस संबंध में सख्त रुख अपनाते हुए अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। वित्त विभाग की ओर से सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की ई-केवाईसी अपडेट कराकर उसकी जानकारी समय पर संबंधित ट्रेजरी कार्यालय को भेजें। साथ ही सभी कर्मचारियों से समय रहते केवायसी प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की गई है, ताकि सैलरी भुगतान में किसी प्रकार की बाधा न आए।

सभी विभागों को समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश
गौरतलब है कि केवायसी अपडेट करने के लिए कर्मचारियों को पहले 24 अप्रैल तक का समय दिया गया था। इसके बाद संचालक कोष एवं लेखा संचालनालय ने 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी थी। इसके बाद तारीख बढ़ती रही, संचालक कोष एवं लेखा सेवा पद्मिनी भोई ने बताया कि अब तक सिर्फ 82 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही प्रक्रिया पूरी की है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय रहते ई-केवाईसी नहीं कराए जाने पर संबंधित कर्मियों के वेतन भुगतान में रुकावट आ सकती है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे इस कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण कराएं।
सेवाओं का लाभ, सत्यापन क्यों नहीं
उल्लेखनीय है कि बैंक खाते, राशन कार्ड, गैस कनेक्शन सहित अन्य रिकार्ड की ई-केवाईसी कराने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। कई लोगों के द्वारा जानकारी नहीं दी जाती है। सवाल यह उठता है कि सेवाओं का लाभ लिया जाता है, लेकिन ई-केवाईसी के नाम पर लोग पूर्व में दी गई जानकारी का सत्यापन क्यों नहीं कराना चाहते?
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