छत्तीसगढ़ राज्य के नए विधान सभा भवन का उद्घाटन देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से हो गया। भावुक प्रधानमंत्री ने डा रमन सिंह की तारीफ में कसीदे भी पढ़े, भावुक भी हुए।इससे परे जो बात लोकतांत्रिक रूप से चुभने वाली है वह है नए विधान सभा भवन के उद्घाटन में लगे शीलालेख से नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत के नाम का गायब होना या कराया जाना। बदले की राजनीति करने वाले भूपेश बघेल ने भी इसी विधान सभा भवन का 2020 में भूमि पूजन किया था तो शिला लेख में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक का नाम लिखाना नहीं भूले थे।

इस बार ऐसा क्या हुआ या किया गया कि चरण दास महंत का नाम नहीं लिखा गया,या लिखने के बाद षड्यंत्र या दुर्भावना वश हटा दिया गया?ये प्रश्न नए विधान सभा के लोकार्पण के बाद राजनीति के गलियारे में घूम रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डा रमन सिंह सीधे सरल और पक्ष के साथ विपक्ष को लेकर चलने वाले है उनसे तो ये गलती जाने क्या, अंजाने में भी नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इन सब कामों से कोई सरोकार नहीं है। फिर कौन व्यक्ति है जो कार्यक्रम के हवन में हड्डी डालने का काम किया।
भीतरी सूत्रों की माने तो नेता प्रति पक्ष का नाम शिलालेख से हटवाने में नौकरशाही से राजनीति में आए ऐसे व्यक्ति की है जिसको पिछले छह महीने से भाजपा के हर खेमे से बाहर किया जा रहा है। खबर ये भी कि चरण दास महंत का नाम कटवाने के लिए अफवाह ये भी फैलाई जा रही है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से ऐसे आदेश मिले थे। अचरज की बात लगती है कि एक शिला लेख में नेता प्रतिपक्ष के नाम हटवाने के लिए दिल्ली को खबर देनी या लेनी होगी।

लोकतंत्र में पक्ष के साथ साथ विपक्ष का प्रोटोकॉल में स्थान है उससे हट कर नाम कटवाने जैसी ओछी हरकत कर भाजपा का जो भी व्यक्ति ऐसे टुच्चा काम किया है उसकी निंदा होनी चाहिए क्योंकि डा चरण दास महंत सीधे सरल सहज व्यक्ति है।उनका दीर्घ कालीन राजनैतिक अनुभव उन्हें विशिष्ट बनाता है। रहा प्रश्न डा रमन सिंह द्वारा ऐसा कार्य करने का तो एक डॉक्टर का नाम दूसरा डॉक्टर नहीं कटवा सकता है। डा रमन सिंह को ये पता लगाने की जिम्मेदारी है कि वे पता लगवाए क्योंकि विधान सभा में चलती तो अध्यक्ष की है।कौन है वो जो डा रमन सिंह के कद को छोटा करने के लिए छोटा काम किया है।
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