छत्तीसगढ़ प्रदेश में राजनीति के अपने अपने उसूल है। एक पार्टी ऐसी है जिसे सत्ता में बैठने की आदत हो गई है।दूसरी पार्टी ऐसी है जो सत्ता में आने और बने रहने के ऐसे हथकंडे अपनाती है कि उस स्तर को देख कर लगता है कि गांधी जी ने सही कहा था कि आजादी पाने के उद्देश्य से बनी पार्टी को 1947 में खत्म कर देना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के 25 साल की आयु में भाजपा सत्रह साल सत्ता में रही है और कांग्रेस आठ साल। पहले तीन साल अजीत जोगी फिर पांच साल भूपेश बघेल। भूपेश बघेल राज्य में निर्वाचित सरकार के पहले मुख्यमंत्री बने थे। कांग्रेस के पहले मुख्यमंत्री। अजीत जोगी ने सत्ता में बने रहने और आने के लिए दो ऐसे घटना को अंजाम दिया जो आज तक जनमानस के जेहन में है।
पहला था छत्तीसगढ़ के जन भैया विद्या चरण शुक्ल के संगी जग्गी हत्याकांड और सत्ता में बाहर होने के बाद पुनः वापसी के लिए तथाकथित झीरम सामूहिक नर संहार। इस घटना में न्यायिक निर्णय कुछ भी हो लेकिन जनता सच जानती है। भूपेश बघेल ने भी सत्ता में आने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से एक खेल को अंजाम दिया। ये कांड महज बारह घंटे में ध्वस्त हो गया था। ये घटना थी तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत का कॉम्पेक्ट डिस्क को जगजाहिर करने का।
भूपेश बघेल ने कांग्रेस भवन के सामने खड़े होकर सीडी बांटने का काम किया था। निर्माता निर्देशक माने गए भूपेश बघेल के ही तथाकथित सलाहकार विनोद वर्मा। यद्यपि आरोप लगने से कोई अपराधी नहीं हो जाता है लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के चलते स्थिति न इधर की होती है न उधर की। भूपेश बघेल को सीबीआई न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य न होने की स्थिति का हवाला देकर मुक्त कर दिया था।इसके विरोध में सीबीआई सेशन कोर्ट गई जहां से फिर से मुकदमा चलाने का निर्णय आ गया है।
याने कका फिर से कॉम्पेक्ट हो गए है कोर्ट में हाजिर होने के लिए। उनके साथ दो और लोग है जिन्हें न्यायालय से राहत नहीं मिली है। एक कांग्रेस और एक भाजपा समर्थक है। पुराने मंत्री राजेश मूणत ऐसे ही चौपाटी स्काईवॉक के कारण चर्चे में रहते ही है अब एक और मुद्दे के चलते उनकी परख हो न हो पूछ बढ़ गई है याने राज्यसभा?
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter