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CG News: मेकाहारा अस्पताल में बिस्तर और दीवारों पर रेंग रहे ‘खटमल’, एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में मरीज परेशान, सोना मुश्किल

CG News: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां इलाज कराने पहुंचे मरीज अब बीमारी से ज्यादा खटमलों के आतंक से परेशान हैं. अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट यानी ACI में हालात ऐसे हैं कि मरीजों के लिए आराम करना भी मुश्किल हो गया है.

मेकाहारा अस्पताल में बिस्तर और दीवारों पर रेंग रहे ‘खटमल’
ACI के लगभग सभी वार्डों में खटमल फैल चुके हैं. मरीजों के बेड, स्टूल, फाइलें और यहां तक कि दीवारों पर भी खटमल रेंगते नजर आ रहे हैं. हालत ये है कि मरीज न दिन में चैन से बैठ पा रहे हैं और न ही रात में ठीक से सो पा रहे हैं. कई मरीजों ने बताया कि खटमलों के काटने से लगातार खुजली, जलन और बेचैनी हो रही है, जिससे उनकी हालत और खराब हो रही है।मरीजों के परिजनों का कहना है कि समस्या सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं है. जो लोग मरीजों से मिलने आ रहे हैं, उनके कपड़ों और सामान में भी खटमल चिपककर घर तक पहुंच रहे हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.

जानें कैसे फैलते हैं ‘खटमल’?

  • दरअसल, खटमल गंदगी, नमी और भीड़भाड़ वाली जगहों में बहुत जल्दी पनपते हैं.
  • जहां सफाई ठीक से नहीं होती, बिस्तर समय पर नहीं धुले जाते या पुराने गद्दों का लंबे समय तक इस्तेमाल होता है, वहां ये तेजी से बढ़ते हैं.
  • अस्पताल जैसे जगहों पर, जहां रोजाना कई मरीज आते-जाते हैं, अगर साफ-सफाई पर खास ध्यान न दिया जाए तो खटमल फैलना आसान हो जाता है.
  • सबसे बड़ी बात ये है कि खटमल बहुत तेजी से बढ़ते हैं. एक मादा खटमल अपने जीवन में सैकड़ों अंडे दे सकती है और कुछ ही दिनों में उनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है.
  • ये छोटे-छोटे कीड़े गद्दों, फर्नीचर, दीवारों की दरारों और कपड़ों में छिप जाते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होता. इन पर कंट्रोल करना भी काफी मुश्किल होता है, क्योंकि ये धीरे-धीरे दवाइयों के खिलाफ भी मजबूत हो जाते हैं. सिर्फ एक बार पेस्ट कंट्रोल कराने से ये खत्म नहीं होते.
  • इसके लिए बार-बार सफाई, बिस्तरों की धुलाई और लगातार निगरानी जरूरी होती है. थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो ये फिर से फैल जाते हैं.

वार्डों में चलाया जाएगा विशेष सफाई अभियान – प्रबंधन
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हर साल 3 से 4 बार पेस्ट कंट्रोल कराया जाता है और इस समस्या को भी जल्द खत्म करने की कोशिश की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, वार्डों में विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा और दोबारा पेस्ट कंट्रोल कराया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके.

व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल
अब सवाल ये है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में अगर ऐसे हालात हैं, तो मरीज आखिर कहां जाएं. ये मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन कब तक इस समस्या पर काबू पाता है और मरीजों को राहत मिलती है.

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