महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन डीजीपी संजय पांडे ने उस समय की महाविकास आघाड़ी सरकार के दबाव में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की थी। विशेष जांच दल की जांच में इस साजिश से जुड़े तथ्यों के सामने आने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संजय पांडे ने बिल्डरों से कथित अवैध वसूली के झूठे मामलों में फडणवीस और शिंदे को फंसाने की योजना बनाई थी और उनके खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2016 में ठाणे नगर पुलिस थाने में दर्ज एक पुराने मामले की दोबारा जांच के आदेश देकर फडणवीस को फंसाने का प्रयास किया गया।
पूर्व डीजीपी रश्मि शुक्ला ने यह खुफिया रिपोर्ट अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले गृह विभाग को सौंपी थी। इसमें संजय पांडे के साथ-साथ तत्कालीन उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटील और सहायक निरीक्षक सरदार पाटील की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में इन अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
जांच में यह भी बताया गया है कि कथित अर्बन लैंड सीलिंग सर्टिफिकेट घोटाले में कई अधिकारियों और नेताओं की भूमिका की पड़ताल की गई, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिले। इसके बावजूद देवेंद्र फडणवीस की संलिप्तता की जांच किए जाने की बात स्वीकार की गई। वहीं, एक अन्य मामले में दिए गए बयान के दौरान फडणवीस को फंसाने की साजिश का जिक्र भी सामने आया है।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और पूरे मामले को महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल से जोड़कर देखा जा रहा है। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़े विवाद की संभावना जताई जा रही है।
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