पंजाब के 23 जिलों में बाढ़ का कहर, सीएम मान ने केंद्र से मांगे बकाया 60 हजार करोड़, बोले- ‘अधिकार मांग रहे, भीख नहीं’

Punjab Flood: पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने राज्य को गंभीर संकट में डाल दिया है. पंजाब के 23 जिले बाढ़ प्रभावित घोषित कर दिए गए हैं. इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से 60,000 करोड़ रुपये के बकाया फंड को तुरंत जारी करने की मांग दोहराई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राज्य का अधिकार है, न कि भीख. साथ ही, उन्होंने किसानों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये मुआवजे और SDRF नियमों में बदलाव की भी मांग की है.

बाढ़ संकट और केंद्र से मांग
पंजाब में भारी बारिश और हिमाचल प्रदेश के बांधों से छोड़े गए पानी के कारण 23 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. लगभग 1,300 गांव और 3 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिसमें धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इस आपदा में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 60,000 करोड़ रुपये के बकाया फंड को तुरंत जारी करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह राशि राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए जरूरी है. साथ ही, उन्होंने केंद्र से स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) के नियमों में बदलाव की अपील की ताकि किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जा सके.

‘अधिकार मांग रहे, भीख नहीं’- सीएम मान
पीएम मोदी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मान ने जोर देकर कहा कि पंजाब ने देश को अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया है और अब समय है कि केंद्र सरकार राज्य को उसका हक लौटाए. उन्होंने फिरोजपुर और होशियारपुर जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए कहा- ‘हम अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, भीख नहीं.’ उन्होंने केंद्र सरकार की शर्तों को राहत कार्यों में बाधा बताया और मुआवजे के मानकों में संशोधन की मांग की. मान ने प्रस्ताव दिया कि बाढ़ में मृतकों के परिवारों को दी जाने वाली एक्स-ग्रेशिया राशि को 4 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये और अपंगता मुआवजे को 74,000 रुपये से 1.5 लाख रुपये (40-60% अपंगता) और 2.5 लाख से 5 लाख रुपये (60% से अधिक अपंगता) किया जाए.

राहत कार्यों में सक्रियता
पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर शुरू किया है. अब तक 15,688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और 7,144 लोग 122 राहत शिविरों में हैं. सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और बीएसएफ ने 11,300 लोगों को बचाया है. मुख्यमंत्री मान और उनकी कैबिनेट के मंत्री, जैसे एल.सी. कटारूचक और तरुणप्रीत सोंड, प्रभावित क्षेत्रों में जाकर राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब इकाई ने सोशल मीडिया पर ‘पंजाब मुख्यमंत्री बाढ़ राहत कोष’ के लिए दान की अपील की है, जिसमें AAP के सांसद और विधायक एक महीने की सैलरी दान कर रहे हैं.

केंद्र का रुख
पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री मान से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. हालांकि, मान ने केंद्र सरकार पर हाल ही में 828 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की परियोजनाओं को रद्द करने का आरोप लगाया, जिससे ग्रामीण कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है.

बाढ़ का प्रभाव
पंजाब में अगस्त में 253.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 74% अधिक है और पिछले 25 वर्षों में सबसे ज्यादा है. गुरदासपुर, कपूरथला, अमृतसर, पठानकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का और होशियारपुर जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. लगभग 3 लाख एकड़ कृषि भूमि और पशुधन को भारी नुकसान हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट में है. मुख्यमंत्री मान ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है. उन्होंने गिरदावरी प्रक्रिया शुरू कर प्रभावित परिवारों को 15 दिनों के भीतर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से मुआवजा देने का वादा किया है.

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