भूपेश बघेल सरकार के घोटाले की विष्णुदेव साय सरकार की तरीके से जांच करे तो एक दर्जन से ज्यादा आई ए एस और आईपीएस अधिकारी जेल जाएंगे, ये आज और प्रमाणित हो गया। अब तक समीर विश्नोई, रानू साहू, टोमन सिंह सोनवानी,अनिल टुटेजा, आलोक शुक्ला, निरंजन दास जीवन लाल ध्रुव गिरफ्तार हो चुके है।
दो संभावित आई ए एस अधिकारी सौम्या चौरसिया और आरती वासनिक भी गिरफ्तार हो चुकी है। भारतीय संवर्ग सेवा के अमर पति त्रिपाठी और मनोज सोनी भी जेल यात्रा कर चुके है। ये सभी कोयला, शराब, चांवल, डीएमएफ लोक सेवा आयोग परीक्षा घोटाले में शामिल पाए गए है। शराब घोटाले में आईएएस विवेक ढांड भी संदेह के दायरे में है।
दवाइयों और स्वास्थ्य उपकरण को लेकर दो आईएस भीम सिंह और चंद्रकांत वर्मा संदेह के दायरे में है,देर सबेर इनको भी जेल जाना ही पड़ेगा। चूंकि राज्य की आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग और भ्रष्टाचार निवारण विभाग के अधिकारी आईपीएस ही होते है इस कारण से सहानुभूति के चलते आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी खुली हवा में घूम रहे है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्ट्राचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसी के चलते केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियो ने बड़ी मछलियों पर हाथ डालने की हिम्मत की है।
राज्य की आर्थिक अपराध एजेंसी फिलहाल पटवारी पकड़ो अभियान में लगी है। राज्य के भ्रष्ट आबकारी,खाद्य, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरिश्चंद्र है। प्रदेश में अरबों का चांवल, शक्कर घोटाला हुआ है।इस पर नजरे इनायत नहीं हो रही है। कांग्रेस शासनकाल में कस्टम मिलिंग और राशन दुकानों से चांवल, शक्कर का अरबों का घोटाले में सिर्फ मार्कफेड के अधिकारी पकड़े गए है।खाद्य संचालनालय के अधिकारी द्वारा कंप्यूटरीकृत वितरण व्यवस्था को तहस नहस कर दिए है।इसकी जांच नहीं हो रही है।
महिला बाल विकास, श्रम, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारियों ने खूब लूट मचाई है।इनके प्रमाण भी है।प्रश्न ये भी उठता है कि सीमित अमले वाला आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग कितनी जांच करे? कांग्रेस शासनकाल के घोटाले की जांच करने के लिए एक हजार अधिकारियों की जरूरत पड़ेगी, याने हर विभाग के जांच के लिए स्पेशल 26
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter