Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट जंग का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट मंडराया हुआ है. श्रीलंका में हालात काफी खराब हो गए हैं. ईंधन को लेकर हाल-बेहाल हैं. इस बीच भारत ने अपनी दरियादिली दिखाई है. पड़ोसी देश होने के नाते श्रीलंका की मदद के लिए भारत आगे आया और ईंधन की आपातकालीन खेप भेजी. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कुछ दिन पहले मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मध्य पूर्व संघर्ष के कारण श्रीलंका में ईंधन आपूर्ति में हो रही दिक्कतों के बारे में बात की थी. भारत के त्वरित सहयोग के लिए आभारी हूं. कल कोलंबो में 38,000 मीट्रिक टन ईंधन पहुंचा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद.”
भारत ने कितनी भेजी खेप?
भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए 38 हजार मीट्रिक टन ईंधन की खेप भेजी है. जिसमें करीब 20 हजार मीट्रिक टन डीजल और करीब 18 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है. श्रीलंका में ईंधन की भारी किल्लत के बीच भारत सरकार ने मदद की है. श्रीलंका ने ऊर्जा संकट के निपटने के लिए पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मदद की गुहार लगाई थी.
श्रीलंका में 15 मार्च से लागू है कोटा
बता दें, श्रीलंका में ईंधन को लेकर हालात काफी खराब होते जा रहे हैं. श्रीलंका की सरकार ने जमाखोरी और लंबी कतारों को रोकने के लिए 15 मार्च से ईंधन के लिए कोटा लागू कर दिया है. ताकि किसी प्रकार की लोगों को समस्या न हो. लगातार प्रशासन जमाखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई भी कर रहा है. तो वहीं ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि देश में मई के अंत तक के लिए ईंधन पर्याप्त है. फिलहाल, श्रीलंका ईंधन संकट से जूझते नजर आ रहा है.
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