MP News: मध्य प्रदेश स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) को बायपास कर जारी की गई 237 अवैध पर्यावरण स्वीकृतियों (Illegal Environment Clearances) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम दौर में पहुंच गया है. “विजय कुमार दास बनाम भारत संघ एवं अन्य” (WP Civil No. 689/2025) शीर्षक से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस पर गंभीरता दिखाई और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव पर्यावरण को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा था .
कोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि ‘सिया’ की बैठकें क्यों नहीं कराईं? प्रमुख सचिव ने पर्यावरणीय स्वीकृतियों का अनुमोदन कैसे कर दिया?.
केंद्र सरकार की पहल
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख, विवाद की संवेदनशीलता और जटिलता को देखते हुए MoEF&CC ने एक हाई पावर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर दी है. यह समिति मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में भी सिलसिलेवार प्रस्तुत किया जाएगा.
हाई पावर कमेटी की संरचना
- अमनदीप गर्ग, अतिरिक्त सचिव, MoEF&CC – अध्यक्ष
- सतीश वाते – सदस्य
- रजत अग्रवाल, संयुक्त सचिव, MoEF&CC – संयोजक
समिति को मंत्रालय के IA–Compliance and Monitoring Division से सचिवीय सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मामले में कैसे हुई गड़बड़ी?
- अप्रैल से जून 2025 के बीच SEIAA की नियमित बैठकें नहीं हुईं.
- ‘सिया’ अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने 48 बार पत्र लिखकर बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया.
- इस दौरान सदस्य सचिव उमा महेश्वरी छुट्टी पर चली गईं और प्रभार में आए शुक्ल ने नियमों का सहारा लेकर 237 परियोजनाओं को ईसी जारी कर दी.
- तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी ने इन अवैध स्वीकृतियों को अनुमोदित भी कर दिया.
- नियम यह है कि यदि 45 दिन में बैठक नहीं होती, तो परियोजना प्रस्तावक को स्वीकृति मान ली जाती है. इसी का सहारा लेकर अनुमतियां बांटी गईं.
- ‘सिया अध्यक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया न केवल अवैध है बल्कि पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी और एप्को की कार्यपालन निदेशक उमा महेश्वरी को पद से तत्काल हटा दिया था.
देश भर में व्यापक असर की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा. यदि गड़बड़ियां साबित होती हैं तो पूरे देश के स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटीज (SEIAAs) की कार्यप्रणाली और पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में मंत्रालय की रिपोर्ट अहम भूमिका निभाएगी और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय होगी.
अब यह मामला सिर्फ एक राज्य की गड़बड़ी नहीं बल्कि देशभर की ईसी प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुका है. गौरतलब है कि केंद्र की हाई पावर कमेटी ने पक्ष रखने के लिए सिया चेयरमैन एस एन सिंह चौहान ,सदस्य सचिव सिया डा सुनंदा सिंह रघुवंशी ,पूर्व सदस्य सचिव उमा माहेश्वरी एवं पूर्व प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठरी को दिल्ली तलब किया है. केंद्र की हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच अंतिम कड़ा निर्णय लेगी. लगता है गाज गिरना तय है ?
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