रायपुर। समता सोसायटी में जमीन अदला बदली के मामले ने तुल पकड़ लिया है। अब मामले में निगम से पास हुए नक्शे पर भी सवाल उठने लगे हैं। जोन 7 के किन अफसरों की संलिप्तता इसका पता लगाने का प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे मामले में पंजीयन के दास्तावेज को भी खंगाला जा रहा है। पटवारी रिकार्ड के पुराने नक्शे और खसरे की तहकीकात की जा रही है। अफसर बहु के कंधे पर बंदूक रखकर वकील ने लगाया निशाना, अपनी जमीन बेच दूसरे के हक पर डाका डाला। पूरे मामले को धोखाधड़ी का मानकर अब आगे की कार्रवाई किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। जिस 510/2 खसरे को 908, 906 में लाकर बिठाया गया है, पूरा खेल किन लोगों ने किया इसे लेकर समता सोसायटी के कर्ताधर्ता औश्र वकील को लपेठने की तैयारी प्रशासन कर रही है।



यहां बता दें कि शांति देवी पंसारी के नाम से जब जमीन का पंजीयन हुआ तक समता सोसायटी हर सदस्य को हाउंसिंग के लिए जमीन का आवंटन कर दस माह में बनाने का उल्लेख किया है। अगर निर्माण कार्य नहीं किया जाता तो संबंधत आवेटन को रद्द किए जाने का नियम बना रखा है। चूकि शांति देवी के पति यहां के कानूनी सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे, इसलिए सोसायटी ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब वकील ने देखा कि समता सोसायटी के विस्तार के साथ कई निजी लोगों की जमीनें भी लगी हुई है, तो उनका लालच बढ़ गया। पेशे से वकील होने के साथ ही उनके लालच को उस समय और बल मिला जब डिप्टी कलेक्टर बहु उनके घर आ गई।



अफसर बहु के बैचमैट से संबंधों का उठाया फायदा
मौके पर अग्रसेन चौक के पास निजी जमीन देखकर उस पर अपने 510/2 खसरा नंबर के पुर्ननिर्धारण का प्रकरण लगाया। प्रकरण लगाने के पूर्व अपने भतीजे और भतीजी के नाम से जमीन का वारिसान बताते हुए शांति देवी से सहमति दिलवाकर बिकवा दिया। अब उन्होंने जमीन नहीं मिलने का बहाना बताकर अफसर बहु के बैचमैट से संबंधों का फायदा उठाकर करोड़ों की जमीन महज एक आवेदन और निगर निवेश के कुूछ हजार रुपए पटाकर रोड़ के पास की जमीन पर कब्जा कर लिया। मामला जब यहां पर निर्माण कार्य होने लगा तब जमीन मालिक ने आपत्ति लगाई। उसके बाद सूचना के अधिकार से सारे कागजात सामने आए। जिला प्रशासन से सीमांकन कराने पर उक्त जमीन भू-स्वामी के नाम पर निकली ऐसे में समता सोसायटी के वकील की चोरी पकड़ी गई।



पहले भी रहा विवादों में
कानून के रखवाले ने अपने अफसर बहु के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना लगाया था, वह सही बैठा, पर उसे नहीं मालूम था कि सामने वाला भी पूरी शिद्धत से अपनी जमीन की रखवाली कर रहा है। अब मामले में समता सोसायटी के अन्य इस तरह के प्रकरणों की जांच की आवश्कता है। वैसे हाईप्राफाइल कॉलोनी में कुछ साल पहले प्रदेश के मंत्री के भाई ने सड़क की जमीन को ही अपनी बताकर घेर दिया था।



वकील के कारस्तानी से हो रही थू-थू
उन्हे में शिकायत के बाद छोड़ना पड़ा था। तब भी समता सोसायटी की थू-थू हुई थी। अब इस मामले में भी सोसायटी की थू-थू वकील की कारस्तानी से हो रही है। सोसायटी स्वयं अपने जमीनों के रिकार्ड को दुरूस्त करे तो सच्चाई सामने आ सकती है। इधर अफसरों से दबाव डलवाने का खेल अब भी चल रहा है। देखना है कि अफसर बहु के अनैतिक और गलत काम की भरपाई उन्हें जल्द करनी होगी।
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