साय सरकार के दो साल- मैक्सिमम वर्क, मिनिमम इगो

जब विष्णु देव साय सरकार के 2 साल के कार्यों का मूल्यांकन करें तो इस बात को जरूर ध्यान में रखना चाहिए कि जब चुनाव हुआ तो कितने बड़ी गारंटियां दांव में लगी थी। 18 लाख घरों के निर्माण के लिए राज्य के बजट को मैनेज करना आसान नहीं था, अब इनकी संख्या 26 लाख हो गई है। किसानों को दी जाने वाली राशि न केवल 2500 से बढ़ाकर 3100 को गई अपितु 21 क्विंटल प्रति एकड़ भी दिया गया, सवाल यह उठता था कि इसे कहां से मैनेज करेंगे। इसके बाद गेमचेंजर योजना महतारी वंदन के लिए भी हर महीने लगभग साढ़े छह सौ करोड़ का बजट मेंटेन करना था। जाहिर है कि इतना बड़ा निवाला लेना तो आसान है लेकिन उसे निगलना बेहद कठिन।

एक कुशल प्रबंधक की तरह विष्णुदेव साय इस चुनौती से बाहर निकले हैं और संतोषजनक रूप से लोगों को मोदी की गारंटी का लाभ मिल रहा है। अगर छत्तीसगढ़ की जनता के जनादेश के प्वाइंट आफ व्यू से इसे देखें तो यह लक्ष्य तो पूरा कर लिया है। दूसरे सरकार में किसी तरह का उथलपुथल नहीं है। मंत्रियों से मुख्यमंत्री की केमेस्ट्री अच्छी है। नौकरशाही के साथ तालमेल अच्छा है। एक अच्छा राजा अच्छे सलाहकार चुनता है तो मुख्यमंत्री ने जो अपनी टीम बिठाई है उसने अपना काम संभाल लिया है। सीएम सेक्रेटेरियट ने बढ़िया काम किया है।

विष्णु देव साय की खूबी यह है कि वे इगो में कोई बात लेकर नहीं चलते। कोई नया प्लान किया, पब्लिक डोमेन में उसे लेकर आये, पब्लिक के बीच कुछ आपत्तियां आईं तो पीछे भी हट जाते हैं जैसाकि गाइडलाइन रेट में हुआ। जनता को तब अच्छा लगता है जब उसका फीडबैक सुना जाता है ऐसा नहीं होता तो वो चुनावी वर्ष में आखरी फीडबैक लाक कर देती है और फिर पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं आता।

अच्छी बात यह भी है कि भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया, छोटे-छोटे भ्रष्टाचार जरूर हो रहे हैं पर सरकार इन पर सख्त है तो मैसेज साफ है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस है। सरकार का प्रचारतंत्र भी काफी अच्छा चल रहा है। वो आम जनता को लगातार पिछले कार्यकाल के बारे में बताता आ रहा है। बिहार में याद रखिये कैसे जंगल राज के बारे में बार-बार बताकर नीतीश और मोदी ने अपनी सत्ता बरकरार रख ली।

जनता से संवाद और इसी तरह से लोप्रोफाइल रहकर सरकार काम करती रहे तो अच्छा है। मैक्सिमम वर्क और मिनिमम इगो के सिद्धांत में सरकार चल रही है और कोई दूसरा फार्मूला जनता को खुश करने में कारगर हो न हो, यह जरूर कारगर होता है।

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