छत्तीसगढ़ के वोटर के पास कोबरा और नाग में से एक सांप ही चुनना है याने सांप ही चुनना है। दोनों जहरीले। पहले के यहां भी सरकारी अधिकारियों का जमावड़ा था दूसरे के यहां भी जमावड़ा है। कहा जाता है कि दिल्ली की सरकार के पास छत्तीसगढ़ शासन का रिमोट है।एक रिमोट चलकर आया और सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में एंट्री मारी। ये वो अधिकारी है जिस पर एक जमाने में फर्जी सहकारी समिति से हजारों क्विंटल धान खरीदवाने का आरोप लगा था। बकायदा विधान सभा समिति भी गठित हुई थी।ये बात अलग है कि राष्ट्रीय समाचार पत्रिका इंडिया टुडे में सुर्खियां बटोरने के बावजूद सरकार की कृपा से बच गए थे।
ये बात भी अलग है कि बचपन में हुए विवाह को अमान्य कर बड़े होकर दूसरा विवाह रचाए भी है। कांग्रेस शासनकाल में सिंह इज किंग दिल्ली पलायन कर गए थे। वहां के कूचे से भी बड़े बदनाम होकर निकले थे पिछले साल इनको नीट की परीक्षा में परचा लीक होने के कारण हटाया गया था। राज्य में भाजपा का शासन आते ही फिर आ आकर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में लैंड किए है।
मलाईदार विभाग के रूप में बिजली विभाग का जिम्मा ले लिए। कांग्रेस शासनकाल में भले ही घोटाले हुए लेकिन इन घोटालों से आम आदमी प्रभावित नहीं था। राज्य के करोड़ो बिजली उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक छूट मिली हुई थी।

राज्य में स्टील उद्योग को प्रदेश में उत्पादन और रोजगार के नाम पर 15 साल की छूट पहले से मिली हुई थी। इसके बाद घोटाला कर्टेल वाले सक्रिय हो गए। बताया जाता है कि पिछली सरकार में 1200 करोड़ का अनधिकृत लाभ स्टील उद्योग से मिला था। इस बार भी खेल हुआ है। सरकार को आम जनता के बीच इतनी जल्दी बदनाम करने का श्रेय कु बोध को जा रहा है।
उद्योगपतियों के साथ मिलकर आम उपभोक्ता को जो झटका दिया गया है उससे गरीब से गरीब आदमी को कम से कम तीन सौ रुपए का झटका लगा है। जिन लोगों के यहां पांच सौ रुपए का बिजली बिल आता था इस बार आठ सौ आया है। बताया जाता है कि विष्णु देव साय की सरकार को बदनाम करने के लिए पिछली सरकार की छूट को वापस ले लिया गया है।
समय रहते विष्णु देव साय ने कठोर कदम उठाए हुए उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसकाने वालों को महत्वपूर्ण जगह से नहीं हटाया गया और आम जनता की राहत को वापस नहीं किया गया तो ये सिद्ध है कि विष्णु देव साय की सरकार वापस नहीं आएगी।
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