Bhopal: भोपाल के कई इलाकों का पानी जहरीला, मिला इंदौर वाला ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया, जांच में 4 सैंपल फेल

Bhopal News: भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर दूषित पाया गया है. जांच के दौरान लिए गए चार पानी के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है. यही बैक्टीरिया पहले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में भी मिला था, जहां इसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है.

सैंपल फेल होने के बाद पानी पर लगी रोक
सैंपल फेल होने के बाद नगर निगम ने इन इलाकों में भूजल के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगा दी है. खानूगांव में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं, जहां अब भी करीब दो हजार लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. दो दिन पहले क्षेत्र के विधायक आतिफ अकील और पार्षद प्रतिनिधि मो. जहीर मौके पर पहुंचे थे. इस दौरान कुएं में सीवेज का पानी जाते हुए वीडियो भी सामने आया, जिसे पार्षद प्रतिनिधि ने खुद रिकॉर्ड किया. विधायक ने निगम के इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें फटकार भी लगाई थी. खानूगांव जिस वार्ड में आता है, वहां की पार्षद रेहाना सुल्तान हैं.

पार्षद प्रतिनिधि मो. जहीर का कहना है कि इलाके में कई दिनों से सीवेज का पानी कुएं में मिल रहा था और उसी पानी को करीब दो हजार लोगों तक पहुंचाया जा रहा था. इस समस्या की लिखित शिकायत करीब 15 दिन पहले की गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते लोगों को दूषित पानी पीना पड़ा.

नगर निगम ने बताया पानी सप्‍लाई के लिए नहीं था
नगर निगम का कहना है कि आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव में पाइपलाइन के जरिए भूजल आधारित जलप्रदाय नहीं किया जा रहा है और नागरिकों को ऐसे स्रोतों का उपयोग न करने की सलाह दी गई है. बुधवार को कुल 250 जल नमूनों की जांच की गई, जिनमें से चार में बैक्टीरिया मिला. इनमें दो नमूने आदमपुर खंती के पास से, एक वाजपेयी नगर के नलकूप से और एक खानूगांव के कुएं से लिया गया था. निगम का दावा है कि इन सभी स्थानों से आधिकारिक रूप से भूजल की आपूर्ति नहीं होती.

शहर में पानी की आपूर्ति भी चिंता का विषय
शहर में पानी की आपूर्ति व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है. अब तक की जांच में सामने आया है कि भोपाल के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं, जहां लगभग 400 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन सीवेज लाइनों के साथ बिछी हुई है. इन इलाकों में करीब पांच लाख की आबादी रहती है. अधिकांश पाइपलाइन पुरानी लोहे की हैं, जिनकी उम्र पूरी हो चुकी है और इन्हीं में सबसे ज्यादा लीकेज होता है. इन्हें बदलने के लिए नगर निगम को लगभग 500 करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है.

75 हजार कनेक्‍शानों की लाइन बदलना जरूरी
शहर में कुल 2.71 लाख नल कनेक्शन हैं, जिनमें से करीब 75 हजार कनेक्शनों की लाइन बदलना जरूरी माना जा रहा है. अमृत-2 योजना के तहत 750 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है. नगर निगम के अनुसार, अब तक एक हजार से ज्यादा पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं और अधिकांश में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है, लेकिन पुराने भोपाल के कई इलाकों में जगह की कमी के कारण पानी और सीवेज की लाइनें साथ-साथ होने से जोखिम बना हुआ है.

कनेक्‍शनों की संख्‍या में होगी बढ़ोतरी
फिलहाल शहर में रोजाना लगभग 450 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई हो रही है, जबकि भविष्य में 2040 तक यह जरूरत 514 मिलियन लीटर प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है. इस मांग को पूरा करने के लिए अगले तीन वर्षों में करीब 448 करोड़ रुपये खर्च कर नेटवर्क विस्तार किया जा रहा है. नगर निगम के मुताबिक, शहर के 85 प्रतिशत वैध इलाकों में पानी की सप्लाई होती है और कनेक्शनों की संख्या बढ़ाकर 3.10 लाख करने की योजना है, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

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