इस्तीफा भेजने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को यूपी सरकार ने किया निलंबित, जांच के आदेश

Bareilly News: उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को सस्पेंड कर दिया है. इसके साथ ही जांच के भी आदेश दिए गए हैं. उन्होंने हाल ही में यूपी सरकार को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है. सस्पेंड के दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा. यह आदेश विशेष सचिव स्तर से जारी किया गया है.

अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को शासन ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उनके आचरण और बयानों से प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित हुआ, जिसके आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है. सरकार ने इसके साथ ही विभाग जांच के भी आदेश दिए हैं. अलंकार की जांच के लिए बरेली मंडल के आयुक्त को जिम्मा सौंपा गया है. जब तक जांच चलेगी, अलंकार अग्निहोत्री शामिली डीएम कार्यालय से संबद्ध रहेंगे.

इस्तीफा देने के बाद बोले अलंकार अग्निहोत्री?
बरेली नगर मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार में काफी समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है. ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन पर अत्याचार किया जा रहा है. कहीं एक डिप्टी जेलर एक ब्राह्मण को पीट रहा है, तो कहीं एक पुलिस स्टेशन में एक विकलांग ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला गया है. मौनी अमावस्या के दिन हमारे ज्योतिष मठ (ज्योतिषपीठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज स्नान करने गए थे. उनके शिष्यों और बुजुर्ग भिक्षुओं को लातों, घूंसे और जूतों से पीटा गया.”

UGC नियम को लेकर क्या बोले अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री ने ब्रह्मणों के मुद्दे के बाद यूजीसी नियम पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार का हालिया नियम, भारत सरकार का 13 जनवरी को जारी किया गया राजपत्र, 2026 के एक कानून के तहत विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को घोषित अपराधी घोषित किया गया है. इसका मतलब है कि आपका बेटा या बेटी वहां पढ़ रहा हो सकता है. कोई भी उनके खिलाफ भेदभाव का झूठा आरोप लगाकर शिकायत दर्ज करा सकता है और समता समिति उनका फायदा उठाएगी.”

बंधक बनाने का भी लगाया आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देने के बाद जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया. उनपर मानसिक दबाव बनाया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान लखनऊ से एक फोन कॉल आया, जिसमें सामने से मौजूद व्यक्ति ने काफी आपत्तिजनक टिप्पणी की. जिलाधिकारी के घर से जान बचाकर बाहर निकलना पड़ा.

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