सुप्रीम कोर्ट ने सीएनटी एक्ट मामले में पूर्व मंत्री एनोस एक्का को राहत दी; शर्तों पर 7 साल की सजा निलंबित की

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को सुनाई गई सात साल कैद की सजा निलंबित कर दी और उन्हें छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े कथित भूमि अधिग्रहण मामले में जमानत दे दी। हालांकि, सीएनटी एक्ट उल्लंघन मामले में कोर्ट ने आदिवासी जमीन बहाली को लेकर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है.

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का की सात साल की सजा निलंबित कर जमानत दे दी. शीर्ष अदालत ने उनसे आदिवासियों की जमीन को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने में सहयोग करने के लिए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को बड़ी राहत देते हुए उनकी सात साल की सजा को निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने उन्हें सीएनटी एक्ट के उल्लंघन से जुड़े कथित भूमि खरीद मामले में जमानत भी प्रदान की है. इस फैसले के बाद एक्का को फिलहाल जेल से राहत मिल गई है, हालांकि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय एक अहम शर्त भी रखी है. अदालत ने एनोस एक्का को निर्देश दिया है कि वे एक हलफनामा दाखिल करें, जिसमें आदिवासियों की जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने में सहयोग करने की बात कही जाए. यह शर्त इस मामले की गंभीरता और आदिवासी भूमि संरक्षण के महत्व को दर्शाती है.

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की. सुप्रीम कोर्ट झारखंड हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एनोस एक्का की सजा निलंबित करने की मांग को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एनोस एक्का को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी कानूनी लड़ाई अभी जारी है.

आपको बताते चले कि रांची में सीबीआई अदालत ने 30 अगस्त 2025 को पूर्व मंत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सीबीआई की जांच के अनुसार एनोस एक्का और उनके सहयोगियों ने रांची जिले में आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज और पते का इस्तेमाल किया था. यह मामला छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के उल्लंघन से जुड़ा है, जो आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाया गया है.

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