छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सहित दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम में उपयोग होने वाली कई दवाओं को अवमानक और मिथ्याछाप घोषित किया है। विभाग ने संबंधित बैच की दवाओं के भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच में कुछ दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को अलर्ट जारी किया गया है।
इन दवाओं के सैंपल जांच में फेल
जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आईपी 5 एमएल के एक बैच को गंभीर रूप से अवमानक पाया गया। इसके अलावा दर्द और बुखार में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं भी लैब टेस्ट में फेल हुई हैं। इनमें हरिद्वार की मैटिन्स हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की नाक्पैन-पी, एनोन फार्मास्युटिकल की फ्लामो स्टार-एपी, हिमाचल प्रदेश की एलवी लाइफसाइंसेज की एसीएचई पी और गो-ईश रेमेडीज लिमिटेड की कोल्ड जिया टैबलेट्स शामिल हैं।
एफडीए ने सभी दवा विक्रेताओं और अस्पतालों को संबंधित बैच का स्टॉक तुरंत हटाने और इसकी जानकारी विभाग को देने के निर्देश दिए हैं।
मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में सघन जांच
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि संबंधित दवाओं का स्टॉक मिलने पर उसे तत्काल जब्त किया जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के उपयोग से किसी प्रकार के साइड इफेक्ट या गुणवत्ता को लेकर शिकायत होने पर लोग हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन ने आम लोगों से बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का इस्तेमाल नहीं करने और सतर्क रहने की अपील की है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की रिपोर्ट में देशभर की कई दवाओं के सैंपल फेल पाए गए थे, जिनमें छत्तीसगढ़ में निर्मित या सप्लाई की गई दवाएं भी शामिल थीं।
बच्चों को दी जाने वाली एल्बेंडाजोल टैबलेट के कई बैच गुणवत्ता जांच में फेल मिले थे। वहीं सर्दी-खांसी और बैक्टीरियल संक्रमण में उपयोग होने वाली एमोक्सिसिलिन टैबलेट में सक्रिय तत्व निर्धारित मानक से कम पाए गए थे। फंगल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक क्रीम भी नकली पाई गई थी, जिसे बिना वैध लाइसेंस के तैयार किया गया था।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter