Women Reservation Bill: संसद में लोकसभा की सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार पास कराने में कामयाब नहीं हो पाई है. मोदी सरकार के लिए ऐसा पहली बार है जब 12 सालों में कोई बिल पास ना करा पाई हो, जो बिल संसद में गिर गया अगर वह पास होता तो 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था.
लोकसभा में बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. 528 का दो तिहाई 352 होता है. इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया है. बिल को लेकर शुरुआत से ही साउथ ही नेता विरोध कर रहे थे. अब जब बिल गिर गया तो तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है.
पहला मौका जब सरकार नहीं पास करा पाई बिल
मोदी सरकार को केंद्र सरकार में 12 साल से ज्यादा का समय हो चुका है. हालांकि ऐसा पहली बार है जब सरकार अपना कोई बिल पास नहीं करा पाई है. बिल पर वोटिंग से पहले पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष से बिल के पक्ष में वोटिंग की अपील की थी. लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ.
बिल गिरने के बाद कांग्रेस ने कहा कि संविधान को कमजोर करने वालों को हमने आज हरा दिया है. वहीं बीजेपी कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी की.
एमके स्टालिन ने क्या कहा बिल को लेकर?
सीएम एमके स्टालिन ने शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं हो पाने के बाद कहा, ‘तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लड़ा और तमिलनाडु जीता भी है. उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण भारत इस पूरे मामले में एकजुट खड़ा रहा, अपनी आवाज बुलंद की और लोकतंत्र की जीत हुई है.
स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती तो महिला आरक्षण विधेयक को अलग करके लोकसभा में पारित करा सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और महिलाएं यह सब देख रही हैं. किस तरह से राजनीति के लिए यह बिल लाया गया.
महिला आरक्षण बिल का क्या होगा?
महिला आरक्षण साल 223 में पास हो गया था. इसे हाल ही में 16 अप्रैल 2026 को नोटिफाई भी कर दिया गया है. इससे साफ है कि यह आरक्षण कानून लागू रहेगा. लेकिन इसका महिलाओं को फायदा साल 2034 के लोकसभा चुनाव से मिलेगा.
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