विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के कुरवाई क्षेत्र में पोलियो की खुराक पिलाने के बाद एक बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्ची की मौत पोलियो की दवा पीने से नहीं हुई है। विभाग का कहना है कि शुरुआती जांच में मौत का कारण श्वास नली में दूध फंसना सामने आया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार
कुरवाई के मेंनखेड़ी गांव निवासी अनिल अहिरवार अपनी बेटी मानसी को पोलियो अभियान के तहत बूथ क्रमांक 69-वी पर दवा पिलाने लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि पोलियो की खुराक पिलाने के कुछ समय बाद बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे तत्काल कुरवाई के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. रामहित कुमार ने बताया कि उपलब्ध प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर बच्ची की मौत का कारण पोलियो की खुराक नहीं है।
जांच के लिए टीम गठित
सीएमएचओ के अनुसार, जिस पोलियो बूथ पर मानसी को दवा पिलाई गई थी, उसी बूथ पर उसकी बड़ी बहन सहित कुल 44 बच्चों ने भी पोलियो की खुराक ली थी। सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी भी अन्य बच्चे में कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पोलियो की दवा से कोई सामूहिक समस्या नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित की गई है।
श्वास नली में दूध फंसने के कारण बच्ची की मौत
बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि श्वास नली में दूध फंसने के कारण बच्ची की मौत हुई। हालांकि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पोलियो टीकाकरण अभियान में पहले की तरह सहयोग करते रहें। अधिकारियों का कहना है कि पोलियो की खुराक बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और आवश्यक है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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