छतरपुर:मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल गुरुवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गई। आंदोलनकारियों का दावा है कि सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और भूख हड़ताल के दौरान उनका करीब 6 किलो वजन कम हो गया है।
मांगों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं
जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ-साथ मझगांव, रूंज, नैगुवां और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित लोग शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले चार वर्षों से पुनर्वास, मुआवजा और विस्थापित परिवारों के अधिकारों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बिना भोजन के रहे
प्रदर्शनकारियों के अनुसार बुधवार को आंदोलन स्थल पर चूल्हा नहीं जला, जिससे वहां मौजूद करीब 500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बिना भोजन के रहे। उनका आरोप है कि परियोजना प्रभावित परिवारों का पारदर्शी सर्वे नहीं कराया गया, ग्राम सभाओं की बैठकें और जनसुनवाई की प्रक्रिया भी ठीक ढंग से पूरी नहीं की गई। साथ ही कई परिवारों की आपत्तियों का अब तक समाधान नहीं हुआ है।
पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि कई पात्र परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को अधिक राशि दे दी गई। उन्होंने पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि मुआवजे की रकम बिचौलियों तक पहुंची है। इन आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है।
गांधीवादी नेताओं का भी समर्थन मिला
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक विस्थापित परिवार को तीन एकड़ जमीन, पुनर्वास के लिए कट-ऑफ वर्ष 2026 तक बढ़ाने, परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा केन-बेतवा लिंक परियोजना के फायदे और नुकसान पर सार्वजनिक चर्चा आयोजित करने की मांग शामिल है। आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और गांधीवादी नेताओं का भी समर्थन मिला।
वरिष्ठ गांधीवादी संतोष कुमार द्विवेदी ने आंदोलन स्थल पहुंचकर कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जरूरी है। वहीं गांधी स्मारक निधि की सचिव दयावंती बहन ने अहिंसक आंदोलनों को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान शहडोल के इश्तियाक भाई ने जनगीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा विवेक यादव और गोलू मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं ने भी आंदोलन के समर्थन में अपने विचार रखे।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter